1980 में कुचू के बूथ कार्यकर्ता थे आदित्य, 46 वर्ष बाद बनेंगे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष

भाजपा ने बार-बार अपने इस कथन को साबित किया है कि उसके यहां का बूथ कार्यकर्ता प्रदेश और राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है। इसी कड़ी में झारखंड भाजपा के नए अध्यक्ष आदित्य साहू को देखा जा सकता है। वर्ष 1980 में ओरमांझी के कुचू गांव के बूथ कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई आदित्य की राजनीतिक यात्रा बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचेगी। 46 वर्ष की लंबी उनकी यह राजनीतिक यात्रा धैर्य, संघर्ष, सहयोग, समर्पण और अनुशासन की परिधि में धीरे-धीरे आगे बढ़ी है। राजनीति की बारीकियां और संगठन के दांव-पेंच उन्होंने पूर्व सांसद रामटहल चौधरी से सीखे, पर किसी भी गुट का ठप्पा उन पर नहीं लगा। वे संयुक्त बिहार में भाजपा के पितामह कैलाशपति मिश्र से लेकर झारखंड के वरीय नेता कड़िया मुंडा, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास आदि की छत्रछाया में लगातार काम किया। किसी भी गुट के नहीं होने के बाद भी वे सबके प्रिय बने रहे। संप्रति वे राज्य सभा सदस्य और प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष हैं, पर पार्टी के बहुसंख्यक कार्यकर्ता उनकी सरलता और सहजता के कायल हैं। कार्यकर्ता कहते हैं, बिना कड़वी बात बोले भी वे सबसे शत प्रतिशत काम करवा लेते हैं। इसीलिए उनका सांगठनिक रिकार्ड अच्छा रहा है। खास कर पलामू प्रमंडल के प्रभारी के रूप में उन्होंने भाजपा को लगातार सफलता दिलाई है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही आदित्य साहू की असली परीक्षा शुरू होगी। सांगठनिक और विरोधी दल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी रणनीति का भी इम्तिहान होगा। सरकार को घेरना, अपनी बात मनवाना, कार्यकर्ताओं में जोश भरना और पार्टी की खोई हुई जमीन को वापस पाना इनके लिए चुनौती होगी। सबसे बड़ी बात कि इन्हें यह साबित करना होगा कि वे एग्रेसिव लीडर हैं तथा जनहित के विषयों पर बड़ा आंदोलन छेड़ सकते हैं। लगातार चुनाव हारने से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है। सरकार भी भाजपा के हर प्रयास को निष्फल कर रही है। संगठन में भी कई ऐसे हैं, जो इनके कमजोर करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में इन्हें अपना घर मजबूत कर हर वर्ग के लोगों को भाजपा से जोड़ना होगा। साथ ही इन्हें यह भी सिद्ध करना होगा कि यह मास लीडर भी हैं।

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