2 महीने में बहुत कुछ बदल जाएगा पूवर्ती में…:खूंखार नक्सली हिड़मा के गांव में 1 हजार जवान तैनात, बीआरओ बना रही पुल-पुलिया और सड़क

मिशन: मार्च 2026 में 344 दिन शेष, नक्सली हिड़मा के गांव में भी शुरू हुआ नक्सलियों के खात्मे का काउंटडाउन बस्तर में नक्सलियों का सबसे मजबूत किला अबूझमाड़ और दूसरे छोर में टेकलगुडम और इससे लगे कुछ गांव हुआ करते थे। पूवर्ती देश के मोस्ट वांटेड नक्सली हिड़मा और नक्सलियों के मिलिट्री दलम के कमांडर बारसा देवा का गांव है। अब इस गांव में लोग इन दोनों नक्सलियों का नाम तक नहीं लेते। ग्रामीण दबी जुबान से हिड़मा का टूटा हुआ घर बताते हैं। पूवर्ती तक जाने के लिए अब सिलगेर से पूवर्ती के बीच सड़क बन गई है। हालांकि अभी यह सड़क पूरी नहीं बनी है पर आवागमन आसानी से हो रहा है। 2 महीने में पूवर्ती की पूरी तस्वीर बदल सकती है। यहां 1 हजार से ज्यादा जवानों की निगरानी में सड़क बनाई जा रही है। साथ ही ड्रोन से भी इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस सड़क को बीआरओ द्वारा बनाया जा रहा है। सुकमा जिले में नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव तक सड़क निर्माण के काम की जिम्मेदारी बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) को दिया गया है। सड़क के माध्यम से गांव तक विकास पहुंचेगा। सड़क बनने से सीधा फायदा इलाके के दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को होगा। ग्रामीणों के सुर भी अब धीरे-धीरे बदल रहे हैं जो नक्सलियों के खात्मे के संकेत दे रहे हैं। हिड़मा के साथ 400 की टीम
कुछ महीने पहले तक पूवर्ती समेत आसपास के इन इलाकों में नक्सली कमांडर हिड़मा, देवा और उनकी बटालियन नंबर एक का वर्चस्व हुआ करता था। नक्सली हिड़मा की इस बटालियन में 300 से 400 की संख्या में नक्सली हैं। 13 करोड़ रुपए की लागत से सिलगेर से लेकर पूवर्ती तक करीब 13 किमी की सड़क बनाई जा रही है, जो​ कि दो महीने में बनकर तैयार हो जाएगी। बीआरओ के पास सड़क बनाने का अनुभव मौजूद बीआरओ को पहले भी बस्तर में सड़कें बनाई है। इसलिए नक्सली हिड़मा के इलाके में सड़क बनाने का जिम्मा दिया गया है। पूवर्ती, टेकलगुडेम समेत आस-पास के इलाके में हाल ही में सुरक्षाबलों के कैंप खुले हुए हैं। बदली तस्वीर नजर आने लगी… हिड़मा के गांव में सिर्फ उसके भाइयों का टूटा हुआ घर बचा गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के खात्मे के लिए मार्च 26 की डेड लाइन दी है। हालांकि नक्सलियों की बटालियन वाले गढ़ में भी साफ तौर पर नक्सलियों के खात्मे की तस्वीर अभी से नजर आने लगी है।
हिड़मा के गांव में अब सिर्फ उसके भाइयों का टूटा हुआ घर बचा है।

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