श्रीगंगानगर| शिक्षा विभाग नए सत्र में नामांकन बढ़ाने पर जोर कर रहा है। इसके लिए घरों से लेकर सोशल मीडिया तक सरकारी स्कूल का प्रचार किया जाता है। लेकिन बीते दो सत्रों में देखें तो स्कूलों के नामांकन में भारी गिरावट देखने को मिली है। इस कड़ी में राज्य सरकार ने जिले के 4 सरकारी प्राथमिक स्कूलों को करीब दो साल से शून्य नामांकन के चलते बंद कर दिया है। इसी तरह से सरकार ने 169 स्कूलों को बंद कर दिया है। इनमें अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या जीरो थी, वहीं, कुछ स्कूल ही सुबह-शाम चल रहे थे। ऐसे स्कूलों को मर्ज करते हुए एक ही कर दिया गया है। इस संबंध में मंगलवार को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने प्रदेश के इन स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी किए हैं। इन स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों को अब अन्य स्कूलों में लगाया जाएगा। इस आदेश में बताया गया है कि राजकीय प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक विद्यालय अत्यंत नजदीक संचालित होने के कारण विद्यालयों में पर्याप्त नामांकन छात्र संख्या उपलब्ध नहीं हो पाती है, जिस कारण आरटीई मानदंडों के अनुसार अध्यापकों के पद स्वीकृत करने के बावजूद शिक्षक उपलब्ध नहीं हो पाते एवं शिक्षा की गुणवत्ता विपरीत रूप से प्रभावित होती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए शून्य नामांकन वाले राजकीय प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक विद्यालयों को ग्राम के निकटतम अन्य प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में समन्वित करने के आदेश दिए गए। इस आदेश के अनुसार पड़ोसी जिला हनुमानगढ़ के दो स्कूलों को मर्ज किया गया है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय 17 एच को राजकीय प्राइमरी विद्यालय 18 एच, राजकीय प्राथमिक विद्यालय 38 पीएसबी को राजकीय प्राथमिक विद्यालय 36 पीएस, राजकीय प्राथमिक विद्यालय 15-16 जी को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सागरवाला व राजकीय प्राथमिक विद्यालय भोजेवाला रोही को राजकीय प्राथमिक विद्यालय 3 बीजेडब्ल्यू में मर्ज किया गया है।


