अटारी बॉर्डर पर पाकिस्तान जाने और भारत लौटने की रविवार को आखिरी दिन था जहां आंसुओं का सैलाब देखने को मिला। कोई सीमा पार से अपनी मां, 2 भाईयों और भतीजे की कब्र पर सजदा करने के लिए भारत आया था, तो कोई 20 साल के बाद अपनी बहनों से मिलने के लिए पुणे आया मगर पहलगाम की घटना ने उनकी ये ख्वाहिशें पूरी नहीं होने दी। 20 साल के बाद सिंध से अपनी 2 बहनों जो पुणे में ब्याही है, को मिलने के लिए 19 अप्रैल को भारत पहुंचे हरीश कुमार अपनी बहनों के साथ अच्छे से मिल नहीं पाएं। हरीश के जीजा करतार रोइड़ा ने बताया कि उनके ससुराल सिंध में है। उनकी शादी 25 साल पहले सिंध में हुई थी। उनकी पत्नी की बहन की भी शादी पुणे में ही हुई है। पिछले 20 वर्षों से हरीश अपनी बहनों से नहीं मिले थे, लेकिन जब उन्हें 45 दिन का वीजा मिला, तो वह 19 अप्रैल को भारत पहुंचे। 2 दिन विभागीय जांच में लग गए और बाकी के दिनों में वह अच्छे से अपनी बहनों के साथ समय भी नहीं बिता पाए, कि यह आदेश आ गया। जिसके चलते आज उन्हें पाकिस्तान वापस जाना पड़ रहा है। हरीश को जब उनकी बहनें अटारी सड़क सीमा पर छोड़ने पहुंची, तो वह अपने भाई के गले लग कर रो रही थी। उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इसके अलावा कई बच्चों को अपनी मां को छोड़कर पाकिस्तान जाना पड़ा क्योंकि मां का पासपोर्ट भारतीय और उनका पाकिस्तानी था। पाकिस्तान के कराची में ब्याही शहबाज राबिया, जो अब पाकिस्तानी नागरिक है। वह 21 अप्रैल को इलाहाबाद आई थी, लेकिन 22 अप्रैल को हुई घटना के बाद से ही प्रशासन और पुलिस की ओर से उसे भारत छोड़ने के लिए कहा गया। अटारी बॉर्डर पर पाकिस्तान लौटते समय उसका दर्द उसकी आंखों से छलक उठा। मीडिया से बात करते हुए राबिया काफी गुस्से में थी। उसने बताया कि 5 साल में उसकी मां, 2 भाई और एक भतीजा सुपुर्द-ए-खाक हो गए लेकिन वह उनके मरने पर भारत नहीं आ सकी। कई बार कोशिश की, लेकिन वीजा नहीं मिला। इस बार वीजा मिला, तो वह अपने पति, जो अब डायिलसिस पर हैं, को कराची छोड़ कर भारत आई और अपनों को ठीक से सजदा भी नहीं कर पाईं। मां के बिना पािकस्तान लौटती युवती की आंखों से आंसू निकल आए।


