नगर निगम में 4 इंजीनियर, 3 इंस्पेक्टर, अलग से एजेंसी… सब बेपरवाह शहर में कहने को तो 20 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं, लेकिन उनसे लोगों को रोशनी नहीं मिलती। मुश्किल से 2-3 हजार लाइटें ही जलती हैं, वह भी िसर्फ मेन रोड पर। मोहल्लों, गलियों में लगी लाइटों को कोई देखनेवाला नहीं है। शहरवासी मेंटनेंस एजेंसी के टोल फ्री नंबर पर शिकायत करते हैं, तो भी समाधान नहीं होता। मेन रोड की लाइटें भी िनयमित नहीं जलतीं। कभी उनसे रोशनी मिलती है, तो सप्ताह भर बाद वे बंद पड़ जाती हैं। अॉपरेशन एंड मेंटनेंस एजेंसी की लापरवाही आैर नगर निगम के अफसरों की उदासीनता देख लोगों ने शिकायत करना भी कम कर दिया है। पूछने पर निगम व एजेंसी के अफसर कभी तार टूट जाने, तो कभी उसमें कार्बन लग जाने का हवाला देते हैं। मेन रोड पर अंधेरे के कारण अक्सर दोपहियासवारों को बैठे हुए मवेशी नहीं दिखते आैर वे हादसे का शिकार हो रहे हैं। स्टील गेट-हीरापुर सड़क का हाल खराब बैंक मोड़ के जेपी चौक से मटकुरिया श्मशान घाट तक की स्ट्रीट लाइटें 10 दिनों से खराब हैं। यही स्थिति मटकुरिया चेकपोस्ट से गोधर जीएम अॉफिस तक की लाइटों की है। पहले शिकायत की गई, तो मरम्मत कर दी गई। लेकिन, उसके दो दिन बाद ही लाइटें फिर खराब हो गईं। स्टील गेट से हीरापुर तक मेन रोड पर लगी करीब आधी लाइटें खराब पड़ी हैं। आईआईटी गेट के आसपास की अधिकतर लाइटें भी खराब हैं। धैया रोड, पॉलिटेक्निक रोड में भी अधिकतर लाइटें सिर्फ िदखावे की रह गई हैं। मोहल्लों में भी लगाई गईं लाइटों के मेंटनेंस पर ध्यान नहीं है। स्ट्रीट लाइटों की िनयमित जांच करने आैर खराब होने पर मरम्मत कराने के लिए नगर निगम में 3 इंस्पेक्टर बहाल हैं। निगम की संबंधित शाखा में दो जेई, एक एई व एक कार्यपालक अभियंता भी पदस्थापित हैं। लाइटों के मेंटनेंस के लिए अलग से एजेंसी भी है। टोल फ्री नंबर 9608226062 पर रोज 25-30 शिकायतें आ रही हैं, पर समाधान मुश्किल से 2-3 का ही होता है।


