तीन साल पहले राशन दुकानों से करीब 216 करोड़ का चावल बेचने के मामले में अब रायपुर समेत राज्य के सभी जिलों के खाद्य निरीक्षकों को नोटिस जारी किया जा रहा है। इसे लेकर खाद्य विभाग के अफसरों में जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि दोषी राशन दुकानदारों से बाजार का खरीदा हुआ चावल लेने के बाद अब उन्हें दोषी ठहराया जा रहा है। खाद्य संचालनालय से जारी होने वाले नोटिस को लेकर अब राज्यभर के अफसर एकजुट हो रहे हैं। इस मामले को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है। राशन दुकानों से राशन चोरी होने के मामले की जांच विधानसभा में बनाई गई विधायकों की समिति कर रही है। इस घोटाले के लिए समिति ने जिम्मेदार अफसरों के नाम मांगे थे। लेकिन नाम देने के बजाय संचालनालय के अफसरों ने सभी खाद्य निरीक्षकों को दोषी मान लिया है। इसमें खाद्य संचालनालय के एक अपर संचालक की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। संचालनालय के अफसरों का कहना है कि राशन दुकानों में हर महीने के बचत के स्टॉक की जानकारी फूड इंस्पेक्टर ही अपने मॉड्यूल से ऑनलाइन भर रहे थे। हर महीने भारी बचत होने के बावजूद वे दुकानदारों को स्टॉक भेज रहे थे। इसलिए उन्हें दोषी माना जा रहा है। अफसरों ने बताया साजिश सड़क पर करेंगे विरोध-प्रदर्शन : राजधानी समेत राज्यभर के फूड इंस्पेक्टरों और छत्तीसगढ़ खाद्य अधिकारी संघ का कहना है कि 2021 से 2023 तक तीन साल की अवधि बीतने के बाद 2025 में कारण बताओ नोटिस जारी करना एक सोची-समझी साजिश है। खाद्य संचालनालय के बड़े अफसरों को बचाने के लिए यह काम किया जा रहा है। इस फैसले का विरोध अब सड़क पर किया जाएगा। उनका कहना है कि फूड इंस्पेक्टरों का काम केवल घोषणा पत्र में बचत चावल मात्रा की जानकारी देना है। कोटा देना है, काटना है या बंद करना है इसकी जिम्मेदारी खाद्य संचालनालय के अफसरों की होती है। इस मामले में जल्द ही वे मुख्यमंत्री और खाद्य मंत्री से मिलकर विरोध दर्ज कराएंगे। 602 राशन दुकान निलंबित
चावल घोटाले में खाद्य संचालनालय ने विधानसभा जांच समिति को जानकारी दी है कि इस मामले में 7927 राशन दुकान वालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद 3278 राशन दुकानों के विरुद्ध आरआरसी जारी हो गई है। यानी उनसे वसूली की प्रक्रिया जारी है। सही जवाब नहीं देने और गड़बड़ी साबित होने पर 602 राशन दुकानों निलंबित और 671 दुकानों निरस्त किया जा चुका है। यह कार्रवाई अभी भी जारी है। इसके अलावा सैकड़ों दुकानदार ऐसे भी हैं जिन्होंने दुकानों से गायब हुआ चावल सरकारी खाते में जमा करवा दिया है।


