2022 में कैडेवर ट्रांसप्लांट की मंजूरी:अंगदान का प्रचार नहीं, इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग 285, मिल रहीं सिर्फ 6

छत्तीसगढ़ में सालभर में औसतन तीन-चार ब्रेनडेड मरीजों के लीवर, किडनी, हार्ट और लंग्स ही दान में मिल रहे हैं। दो साल पहले(दिसंबर 2022) में जब से प्रदेश में ब्रेन डेड के अंगों के ट्रांसप्लांट की मंजूरी मिली है, तब से अब तक 19 मरीजों का किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट किया गया है। जबकि दान में किडनी-लीवर लेने के लिए 285 मरीजों ने स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन(सोटो) में रजिस्ट्रेशन करवाया है। इनमें 95% मरीज किडनी यानी गुर्दे के हैं। अभी दान में जितने लीवर-किडनी मिल रहे हैं, उस हिसाब से रजिस्ट्रेशन कराने वालों की वेटिंग लिस्ट 10 साल में भी क्लियर नहीं हो सकेगी। अंगदान करने वालों के परिजन का सम्मान भी नहीं हो रहा
तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्य में जहां अंगदान के लिए लोगों को जागरूक करने बड़े राजनेता और मंत्री खुद सामने आ रहे हैं, वहीं, छत्तीसगढ़ में बड़े नेताओं के पास न समय है और न विभागीय बजट। यहां तक कि जिन लोगों ने किडनी-लीवर दान दिया है, उनके परिवार का सम्मान करने के लिए समय तक नहीं दे रहे हैं। सोटो ने नेताओं को दानवीर परिवारों का सम्मान करने के लिए करीब छह माह पहले समारोह आयोजित करने का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन मंजूरी नहीं दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां अंगदान के लिए जागरूक करने का कोई प्रयास ही नहीं किया जा रहा है। हालात नहीं बदले तो 10 साल में भी वेटिंग लिस्ट नहीं होगी क्लियर इन प्रयासों के कारण दूसरे राज्यों में अंगदान ओडिशा: तेजी से बढ़ा अंगदान, यहां परिवार के सदस्य को नौकरी ओडिशा में पिछले तीन साल से अचानक ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान की रफ्तार बढ़ गई है। पहले वहां भी छत्तीसगढ़ जैसी स्थिति थी। अब 30-35 तक अंगदान हो रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के अलावा ब्रेनडेड होने पर परिवार के सदस्य अगर अंगदान की मंजूरी देते हैं, तो एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जा रही है। अंगदान में तेलंगाना सबसे आगे(2023) तेलंगाना – 252
तमिलनाडु – 178
कर्नाटक – 178
महाराष्ट्र – 148
छत्तीसगढ़ – 07 2023 में केंद्र से सोटो को मिले थे 90 लाख, फर्नीचर-सैलरी पर खर्च
पड़ताल में पता चला है कि 2023 में केंद्र ने 90 लाख रुपए का बजट दिया था। ये राशि स्थापना खर्च यानी स्टाफ की सैलरी और सोटो के ऑफिस के फर्नीचर, कंप्यूटर खरीदी की थी। अब तक राज्य सरकार ने बजट नहीं दिया। प्राथमिकता कमेटी तय करती है, पर ऐसा अब तक नहीं छत्तीसगढ़ में मरीज गंभीर होने पर कमेटी की अनुशंसा पर प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसप्लांट के लिए अंग दिए जाने का प्रावधान है। कमेटी में उस बीमारी के विशेषज्ञों को रखा जाता है। ये स्थिति हार्ट और लीवर के मरीजों के लिए पैदा होती है। अभी तक यहां एक भी मरीज ऐसा नहीं आया है जिसकी स्थिति के आधार पर अंगदान की मंजूरी दी जा सके। फिलहाल यहां रजिस्ट्रेशन के आधार पर अंगदान देने का सिस्टम बनाया गया है। आक्रामक अभियान जरूरी, तब ही लोग होंगे जागरूक वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर संदीप दवे के मुताबिक ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए सरकार और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर आक्रामक अभियान चलाने की जरूरत है। तभी लोग जागरूक होंगे। बताना होगा कि अगर डॉक्टर ब्रेन डेड घोषित करते हैं तो उनकी यादों को जीवित रखने के लिए अंगदान से बेहतर कुछ नहीं है। ​​​​​​​ ऐसे संकल्प की जरूरत: पूर्व उप मुख्यमंत्री सिंह देव ने मृत्यु उपरांत अपने नेत्र एवं किडनी, लीवर व अन्य अंगों के दान का संकल्प लेते हुए केंद्र सरकार के वेबसाइट पर अपना पंजीयन कराया है। सीधी बात : डॉ. विनीत जैन, सोटो चेयरमैन प्रचार के लिए बजट ही नहीं मिला, सम्मान समारोह करेंगे
सवाल- ब्रेनडेड मरीजों के अंगदान कम हो रहे हैं, क्यों?
जवाब- जागरुकता की कमी के कारण ऐसा है।
सवाल- इस बारे में दूसरे राज्यों की तरह प्रयास क्यों नहीं?
जवाब- अभी बजट मांगा है। उसके बाद प्रचार-प्रसार करेंगे।
सवाल- दानवीर परिवारों को फायदा या सम्मान क्यों नहीं?
जवाब- शासन स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। सम्मान जल्द करेंगे।

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