2022 हादसा:हेलीकॉप्टर के पीछे वाला पंखा खराब था, सुधारा नहीं इसलिए मारे गए दो पायलट

माना एयरपोर्ट पर 12 मई 2022 शासकीय हेलीकॉप्टर अगस्ता A109E लैंडिंग में क्रैश होने से दो पायलट मारे गए थे। तब लैंडिंग मेंं रनवे पर चलते समय हेलीकॉप्टर 3 बार पलटा। डीजीसीए ने 3 साल जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की है। इसमें लापरवाही व चूक का खुलासा है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि छत्तीसगढ़ में हेलीकॉप्टर के मेंटेनेंस की एसओपी का पालन ही नहीं किया जा रहा था। हेलीकॉप्टर का मेंटेनेंस सिस्टम कमजोर था। इसके पिछले हिस्से में लगने वाला छोटा पंखा यानी टेल रोटर खराब था। तब भी मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा था। एयरपोर्ट पर सुरक्षा इंतजाम तैयार रखने का कल्चर ही नहीं था। यही वजह है कि जब हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग हुई, तो उसे खींचने के लिए ट्रैक्टर जैसा टोइंग आर्म भी नहीं था। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि मेंटेनेंस में इतनी लापरवाही थी कि जो जरूरी पार्ट्स एक्सपायर हो रहे थे, उन्हें बदला भी नहीं जा रहा था। जबकि हेलीकॉप्टर के प्रत्येक पार्ट के इस्तेमाल की डेडलाइन कंपनी तय करती है। उससे ज्यादा समय उपयोग करना अगर जरूरी है तो कंपनी से एनओसी लेनी पड़ती है। छत्तीसगढ़ में स्थिति उलट थी। यहां हेलीकॉप्टर के पार्ट्स की एसओपी के अनुसार हैं या नहीं, इसकी जांच भी नहीं की जा रही थी। टोइंग आर्म यानी खींचने के लिए ट्रैक्टर जैसा वाहन भी नहीं था: एयरपोर्ट पर किसी भी आपात लैंडिंग की स्थिति से निपटने के लिए टोइंग आर्म अनिवार्य रूप से रहता है। यह ट्रैक्टर जैसा होता है। इससे हेलीकॉप्टर को बांधकर खींचा जाता है। माना एयरपोर्ट पर यह नहीं था। इसलिए लैंडिंग के तुरंत बाद पायलट ने हेलीकॉप्टर का इंजन बंद नहीं किया और उसे रनवे की ओर ले जाने लगा। इसी कोशिश में हेलीकॉप्टर पलटा। अगर टोइंग आर्म होता तो हेलीकॉप्टर का इंजन लैंडिंग करते ही बंद कर टोइंग आर्म से खींचकर रनवे तक ले जाया जाता और हादसा नहीं होता। जो पायलट जिम्मेदार, उसे ही बनाया मुख्य तकनीकी सलाहकार डीजीसीए की रिपोर्ट में चीफ पायलट को भी हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। हैरानी की बात है कि दो पायलट की मौत के बाद भी तत्कालीन सरकार ने घटना की जांच नहीं कराई। चीफ पायलट पर कोई एक्शन भी नहीं लिया। वे अब भी विमानन विभाग में मुख्य तकनीकी सलाहकार व डिप्टी डायरेक्टर के रूप में संविदा पर प्रति महीने 3 लाख से ज्यादा की सैलरी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि 2022 के बाद राज्य में एक भी हेलीकॉप्टर नहीं है। रिपोर्ट में ये भी खामियां की उजागर हेलीकॉप्टर के पायलट, को-पायलेट में समन्वय नहीं था {लैंडिंग के साथ इंजन बंद करना था, पर वे रनवे पर चलाने लगे {रनवे में चलाने के दौरान ही हेलीकाप्टर पलट गया
हादसा रिकॉल: 12 मई 2022 को छत्तीसगढ़ के सीनियर पायलट जीके पांडा की औपचारिक टेस्टिंग चल रही थी। इसके लिए दिल्ली से वरिष्ठ पायलट आए थे। पायलट ने टेस्टिंग के दौरान हेलीकॉप्टर को लैंड कराया। इसी के बाद जैसे ही हेलीकॉप्टर रनवे की ओर बढ़ रहा था, तभी टेल रोटर यानी पिछले हिस्से का पंखा बंद होने से 3 बार पलट गया। यही हादसे की वजह बना। सरकार का फैसला है
3 साल से हेलीकॉप्टर नहीं है। तब भी तकनीकी सलाहकार, डिप्टी डायरेक्टर पद पर उसी पायलट को पोस्टिंग देने का निर्णय सरकार का है।
संजीव झा, डायरेक्टर, विमानन विभाग क्रैश होने की जांच रिपोर्ट मुझे नहीं मिली है। अगर जारी हुई है तो एविएशन डायरेक्टर से मंगवा कर परीक्षण करेंगे। उसके आधार पर आगे का निर्णय लेंगे।
बी. राजू, सचिव, विमानन विभाग

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