सतपाल | जालंधर फाइल पास करने के बदले 30 हजार रुपए मांगने के मामले में गिरफ्तार किए गए असिस्टेंट टाउन प्लानर सुखदेव वशिष्ठ के करप्शन के नेटवर्क को ब्रेक करने के लिए विजिलेंस ने शनिवार को जांच तेज कर दी। शनिवार को विजिलेंस ने जांच के लिए 5 लोग बुलाए थे। ये वे लोग थे, जिनकी इमारत को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। विजिलेंस ने बतौर गवाह उनसे एटीपी के बारे इनपुट लिए। आरोपी एटीपी वशिष्ठ के पिता वेद व्यास नगर निगम में असिस्टेंट कमिश्नर थे। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें एक्सटेंशन दी गई थी। वेद व्यास बीजेपी नेताओं की लॉबी से जुड़े रहे हैं। सुखदेव के भी संघ में अच्छे रिश्ते हैं। एटीपी पहले सिटी रेलवे स्टेशन के बगल में स्थित मोहल्ला गोबिंदगढ़ में रहते थे। विजिलेंस ने निगम से एटीपी के कार्यकाल के रिकॉर्ड की जांच की। निगम के अनुसार 25 अप्रैल 2022 से 17 मार्च 2023 और 2 नबंवर 2023 से लेकर 22 अक्टूबर 2024 बतौर एटीपी रहे हैं। इतना ही नहीं 20 फरवरी को उन्हें सिटी के सेक्टर 13,14,17,18, व 19 का एडिशनल चार्ज मिला था। ये सेक्टर सेंट्रल और वेस्ट हलके के हैं। 2 दिन का रिमांड खत्म होने पर एटीपी सुखदेव वशिष्ठ को विजिलेंस शाम करीब 4 बजे कोर्ट में लेकर आई। यहां पर विजिलेंस ने यह कह कर 10 दिन का रिमांड मांगा कि आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया है। उससे वह स्पेशल रजिस्टर बरामद करना है। जिस पर स्पेशल नोटिस जारी करने का रिकॉर्ड दर्ज करता था। इतना ही आरोपी से पता करना है कि उसके साथ-कौन कौन लोग हैं। बचाव पक्ष के एडवोकेट दर्शन सिंह दयाल ने 10 दिन के रिमांड पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले ही 2 दिन के रिमांड पर विजिलेंस उनके क्लांइट से पूछताछ कर चुकी है। उनके क्लांइट पर केवल पैसे मांगने के आरोप हैं न कि पहले पैसे लेते पकड़े गए हैं। उनके क्लांइट पर झूठा केस बनाया गया है। विजिलेंस के पास अब तक और कोई गवाह सामने नहीं आया, जो यह साबित कर सके कि उनके क्लांइट पैसे लेते थे। विजिलेंस एक ऐसे केस की जांच कर रही है, जिसमें केवल पैसे मांगने का आरोप है। ऐसे आरोप तो कोई भी किसी पर लगा सकता है। करीब 22 महीने के कार्यकाल के दौरान डायरी डिस्पैच रजिस्टर की जांच की तो खुलासा हुआ कि सुखदेव ने 222 नोटिस जारी किए थे। रजिस्टर में 34 डिस्पैच नंबर खाली छोड़ दिए थे। विजिलेंस उन 34 लोगों को जांच के लिए सोमवार को तलब करेगी, जिनके डिस्पैच नंबर खाली छोड़े गए थे। विजिलेंस को नगर निगम ने एटीपी सुखदेव की ओर से डील की गई 30 फाइलों सौंपी हैं, जिनमें से 12 फाइलें ऐसी निकलीं, जिन पर उनके बॉस ने एक्शन लेने के आदेश पास किए थे, मगर एटीपी ने एक्शन नहीं लिया। सुखदेव ने 30 में से 11 फाइलों पर ही एक्शन लिया है। इतना ही 6 फाइलें ऐसी हैं, जिन में एटीपी की ओर से दिए गए नोटिस का जबाव आ चुका था, लेकिन उसने फाइल आगे अपने बॉस को नहीं भेजी। अंतिम फाइल नं. 210025 पर पर्चा दर्ज हुआ है। 20 फरवरी से 13 मई तक का भी रिकॉर्ड मांगा है। विजिलेंस निगम में फैले करप्शन के सेटिंग के खेल से जुड़े सफेदपोश और नामी लोगों के चेहरे से पर्दा उठाने के लिए हर एंगल पर जांच कर रही है। विजिलेंस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी केवल स्पेशल नंबर लगाकर नोटिस भेजता था, लेकिन इसका रिकॉर्ड विभाग के आधारिक रजिस्टर में नहीं है। नोटिस तो विजिलेंस को मिल चुके हैं, लेकिन आरोपी ने स्पेशल रजिस्टर बरामद नहीं करवाया है। 22 महीने के दौरान जारी किए गए 222 नोटिस में से कुछ ऐसे नोटिस मिले हैं, जिनके डिस्पैच रजिस्टर और फाइल पर अलग-अलग नंबर लगे हैं। ये दोनों नंबर आपस में मेल नहीं खाते हैं। विजिलेंस ने आरोपी के दोनों मोबाइल की जांच की तो उसमें नामी लोगों से लेकर सफेदपोश लोगों के नंबर सेव किए थे। सैटिंग का खेल इंटरनेट कॉलिंग के जरिये खेला जाता था। जांच में यह बात आ रही है कि नेटवर्क से जुड़े नामी दलाल इमारत मालिक को नोटिस मिलने के बाद उसके टच में आ जाते थे। सुखदेव वशिष्ठ


