भास्कर न्यूज | प्रतापपुर वन्यजीव संरक्षण और जंगल में जल स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से स्वीकृत कैंपा मद अब प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार और वन अपराध का प्रतीक बनता जा रहा है। नवाडीह गांव के जंगल क्षेत्र में लगभग 24 लाख की लागत से बनाए गए दो चेक डैम मौके पर घोटाले की गवाही दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कागजों में मजबूत संरचना दर्शाई गई, जबकि धरातल पर चेक डैम मिट्टी के ढेर में तब्दील नजर आ रहे हैं। स्थल निरीक्षण में स्पष्ट हुआ कि चेक डैम निर्माण में तकनीकी, पर्यावरणीय और कानूनी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई। जहां नदी के बीच पत्थर, बोल्डर और सीमेंट से पुख्ता संरचना बननी थी, वहां केवल मिट्टी डालकर कार्य पूरा दिखा दिया। न सीमेंट का उपयोग हुआ, न गिट्टी और ना ही पत्थर। सवाल उठ रहा है कि प्रति चेकडैम 12-12 लाख की राशि कहां खर्च हुई। सबसे गंभीर मामला यह है कि जिस कार्य को श्रमिकों से कराना था, वहां जेसीबी मशीन का खुलेआम उपयोग किया गया। इसके बावजूद दस्तावेजों में मजदूरी दर्शाते हुए फर्जी मस्टर रोल भर दिए गए। इतना ही नहीं, सिर्फ 50 मीटर दूरी पर दूसरा चेक डैम बना दिया गया। जानकारों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह का कार्य संभव ही नहीं। सबसे चौंकाने वाला पहलु यह है कि इस तथाकथित निर्माण कार्य के दौरान कई हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की गई। कई पेड़ों को जेसीबी से जड़ समेत उखाड़ दिया। विडंबना यह है कि जिन वन्यजीवों के नाम पर यह पूरा खेल खेला गया, उन्हें आज भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। मिट्टी से बने ये चेक डैम पहली तेज बारिश में ही बह जाने की स्थिति में हैं। डीएफओ से कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की जा रही है वन विभाग के एसडीओ संस्कृति बारले ने बताया कि मामले की जानकारी मिल चुकी है। डीएफओ से कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की जा रही है। प्रारंभिक जांच में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार सामने आया है। सर्कल के वन दरोगा और वनपाल को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। वन्यजीवों के लिए बनाए गए कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


