राजधानी रांची के किसानों के लिए तरबूज की खेती वरदान साबित हो रही है। आज से छह सात साल पहले जहां तरबूज की खेती करना कोई किसान सोचता भी नहीं था, वहीं आज कई प्रखंडों में इसकी खेती की जा रही है। इनमें चान्हो, मांडर, बुढ़मू, पिठोरिया शामिल हैं। सिर्फ ओरमांझी क्षेत्र में 500 एकड़ से ज्यादा में इसकी खेती हो रही है। ओरमांझी के 50 से 60 किसान तरबूज व खरबूज की खेती कर रहे हैं और लाखों में कमा रहे हैं। ओरमांझी के आनंदी गांव के किसान राजीव बताते हैं कि इस साल उन्होंने आठ एकड़ में तरबूज की खेती की है, जिस पर उन्हें 8 लाख रुपए की लागत आई है। तरबूज से उन्हें 15 से 16 लाख रुपए की आमदनी होगी। सिर्फ एक फसल से उन्हें आठ से नौ लाख रुपए की कमाई होगी। इतनी कमाई उन्हें किसी दूसरी फसल में नहीं होती थी, इसलिए तरबूज की खेती को उन्होंने अपनाया। उनके साथ-साथ कई और किसान भी बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर रहे हैं। रांची में ही तरबूज की मांग इतनी ज्यादा है कि 80 फीसदी खपत रांची व आसपास में ही हो जाती है। ओरमांझी के तरबूज को बिहार और बंगाल तक भी भेजा जा रहा है। अप्रैल के अंत तक फसल तैयार होकर मार्केट में आ जाएगी। 2019 से शुरू हुई खेती अब वृहत आकार ले चुकी है। ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई करते हैं, इससे तरबूज की खेती करने से लागत कम आती है और उपज ज्यादा होती है।


