भास्कर न्यूज| जांजगीर सनातन या हिंदू धर्म में साल के 12 महीने पर्व त्योहार रहते हैं। इसकी शुरुआत जनवरी में मकर संक्राति से होती है और अंत विवाह पंचमी से। लेकिन इस साल 2025 में सारे पर्व और त्योहार जल्द आ रहे हैं। सरस्वती पूजा पिछले वर्ष 14 फरवरी को मनाई जाएगी, मगर इस साल 3 फरवरी को मनाई गई। इसी तरह होली 12 दिन पहले 14 मार्च को मनाई जाएगी। रामनवमी, रथयात्रा, दुर्गापूजा, धनतेरस, दीपावली व छठ पूजा भी पिछले साल की तुलना में पहले पड़ेगा। इस साल अक्टूबर मंे ही दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ महापर्व संपन्न हो जाएगा। शारदीय नवरात्र की शुरूआत 22 सितम्बर को होगी। 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ दुर्गापूजा का समापन होगा। 5 नवम्बर को देव दीपावली मनाई जाएगी। इस बार सारे पर्व 11 से 12 दिन पहले मनाए जाएंगे। वर्ष 2024 में 9 फरवरी को मौनी अमावस्या, 14 को बसंत पंचमी, 8 मार्च को महाशिवरात्रि, 25 मार्च को होली, 9 अप्रैल को चैत नवरात्रि, 17 अप्रैल को रामनवमीं, 7 जुलाई को रथयात्रा, 19 अगस्त को रक्षाबंधन, 26 अगस्त को जन्माष्टमी, 11 अक्टूबर को महाष्टमी, 12 अक्टूबर को दशहरा, 29 अक्टूबर को धनतेरस और 1 को दीपावली मनाई गई थी। सूर्य और चंद्र वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर पं. कृष्णकांत मिश्रा ने बताया कि हिंदू पंचांग सौर मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घंटे के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार, सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग एक मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास या मलमास का नाम दिया गया है। पिछले वर्ष मलमास के कारण सारे त्योहार अंग्रेजी डेट के अनुसार देर से आए थे।


