भास्कर न्यूज | बालोद ओबीसी महासभा ने जातिगत जनगणना और छत्तीसगढ़ में 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर शनिवार को आमसभा और सद्भावना बाइक रैली निकाली। रैली के बाद तहसीलदार बालोद को प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, सामाजिक न्याय मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें मुख्य रूप से 32 वर्षों से लंबित 27% ओबीसी आरक्षण को तत्काल लागू करने, जातिगत जनगणना शीघ्र कराने, ओबीसी को आबादी के अनुपात में कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका, मीडिया और निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई। ज्ञापन में ओबीसी आरक्षण में लागू क्रीमीलेयर और 50% की सीमा समाप्त करने, मंडल कमीशन की सभी सिफारिशें लागू करने, 27% आरक्षण को सभी राज्यों में समान रूप से लागू करने और इसे संविधान की नवमी अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई। सभी तहसील मुख्यालयों में ओबीसी छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रावास खोलने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, केंद्र और राज्य के सरकारी संस्थानों में रिक्त पदों पर बैकलॉग भर्ती करने, छात्रवृत्ति में विसंगति दूर कर एससी-एसटी के समान शर्तों पर ओबीसी को छात्रवृत्ति देने की बात कही गई। ओबीसी के लिए अलग मंत्रालय बनाया जाए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सभी सरकारी हायर सेकंडरी स्कूलों में कृषि संकाय शुरू किया जाए, ओबीसी प्रमाण पत्र की प्रक्रिया सरल की जाए, राज्य और केंद्र के बजट में आरक्षण के अनुपात में प्रावधान हो, ओबीसी के लिए अलग मंत्रालय बने और ओबीसी सुरक्षा कानून बनाया जाए। किसानों को समय पर खाद-बीज मिले और 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो। राज्य प्रशासनिक सेवा में साक्षात्कार की प्रक्रिया बंद हो। 2005 से शासकीय भूमि पर काबिज ओबीसी लोगों को वन भूमि पट्टा दिया जाए। संविदा, अनियमित और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए। बर्खास्त बीएड सहायक शिक्षकों को विभाग में समायोजित किया जाए। शासकीय स्कूलों में कार्यरत अंशकालिक स्वीपर को पूर्णकालिक किया जाए।


