रांची | हाईकोर्ट ने देव किशोर ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उन्हें एसीपी और एमएसीपी का लाभ उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि 27 जून 1986 से दिया जाए। न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को 2011 में पहला एसीपी दिया गया, जो गलत है। देव किशोर ठाकुर की सेवा 1986 में शुरू हुई थी। 1991 में उन्हें सेवा से हटा दिया गया। इसके बाद कई कर्मचारियों ने पटना हाईकोर्ट की रांची बेंच में याचिका दायर की। कोर्ट से उन्हें राहत मिली। देव किशोर ने भी 2001 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर उनका मामला अन्य कर्मचारियों जैसा है तो उन्हें बिना बकाया वेतन के बहाल किया जाए। राज्य सरकार ने उन्हें बहाल करने के बजाय नई नियुक्ति दे दी। कोर्ट ने इसे राज्य की शक्ति का दुरुपयोग बताया। कोर्ट ने कहा कि जब बहाली का आदेश था तो नई नियुक्ति देना गलत है। याचिकाकर्ता को मजबूरी में सेवा ज्वॉइन करनी पड़ी। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को 2011 में एसीपी देना गलत था। उन्हें 1986 से सेवा में मानते हुए एसीपी और एमएसीपी का लाभ दिया जाए। अगर वे द्वितीय एसीपी और तृतीय एमएसीपी के पात्र हैं तो वह भी दिया जाए। चूंकि वे 2017 में रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उनका वेतन संशोधित किया जाए और सेवानिवृत्ति लाभ और बकाया राशि 12 हफ्ते में दी जाए।


