27 भारतीय रूस में फंसे:सांसद हनुमान बेनीवाल ने वतन वापसी के लिए प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को लिखा पत्र

नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने रूस में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी जल्द वतन वापसी को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग दोहराई है। सांसद बेनीवाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को पत्र लिखकर इस मामले में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। सांसद ने पत्र में स्पष्ट किया कि एजेंटों द्वारा सिविल रोजगार का झांसा देकर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू जैसे राज्यों के युवाओं को धोखे से रूसी सेना में भर्ती करवा दिया गया है, जो बेहद चिंताजनक है।

​परिजनों ने सांसद आवास पर बयां किया अपना दर्द ​बुधवार को दिल्ली स्थित सांसद हनुमान बेनीवाल के आवास पर रूस में फंसे 24 भारतीय युवाओं के परिजन पहुंचे। मुलाकात के दौरान परिजनों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरे मानसिक तनाव और डर में जी रहे हैं। सांसद बेनीवाल ने परिजनों को सांत्वना देते हुए आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को सरकार के समक्ष प्राथमिकता के साथ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिजनों को उनके बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में सटीक जानकारी देना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।

​शीतकालीन सत्र के सरकारी आंकड़ों का दिया हवाला ​सांसद बेनीवाल ने अपने पत्र में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों का जिक्र करते हुए स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सरकारी जवाब के अनुसार अब तक कुल 211 भारतीय नागरिक इस संकट में शामिल पाए गए हैं, जिनमें से केवल 121 युवाओं को ही अब तक स्वदेश लाया जा सका है। शेष 63 नागरिक अभी भी रूसी सेना में सेवा दे रहे हैं, जिनमें से कई के लापता होने की आशंका है। इसके अलावा, सांसद ने 27 भारतीय नागरिकों की दुःखद मृत्यु पर भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे एक गंभीर मानवीय संकट बताया।

​लापता युवाओं की तलाश के लिए विशेष हस्तक्षेप की मांग ​सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार से मांग की है कि लापता युवाओं की वर्तमान स्थिति का पता लगाने और उनकी वतन वापसी के लिए रूसी सरकार के साथ कूटनीतिक स्तर पर प्रभावी संवाद किया जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कुछ युवाओं का नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा है। बेनीवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस पूरे विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए उन युवाओं को तत्काल राहत प्रदान की जाए जो युद्ध क्षेत्र में या किसी अन्य संदिग्ध स्थिति में फंसे हुए हैं।

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