3 जुलाई को होगा रातू रोड फ्लाइओवर का उद्घाटन:400 करोड़ रुपए की लागत से 26 महीने में तैयार हुआ, 1 लाख लोगों को जाम से मिलेगी मुक्ति

रांची की बहुप्रतीक्षित रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर एवं फ्लाईओवर तैयार हो चुका है। इसका उद्घाटन 3 जुलाई को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी इसका शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय मंत्री की ओर से तारीख को लेकर सहमति दे दी गई है। अब तक इसका शुभारंभ होने की तारीख 19 जून तय था। अब केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने ट्वीट कर नई तारीख की जानकारी दी है। इससे पहले उन्होंने सोमवार को एनएचआई के अफसरों के साथ बात की। उन्होंने निर्देश दिया कि पिलरों पर भी तिरंगे के रंग में लाइटिंग की जाए। लाइटें लगाने का काम शुरू हो चुका है। उधर, नीचे पिलरों के बीच में खाली पड़ी जगह पर घास और पौधे लगाने का काम भी अंतिम चरण में है। रातू रोड क्षेत्र की एक लाख आबादी को मिलेगी जाम से मुक्ति इस बहुप्रतिक्षित फ्लाईओवर का इंतजार रांची एवं खासकर रातू रोड की जनता वर्षों से कर रही थी, जो अब पूरा होने जा रहा है। 3 जुलाई को यह सौगात रांची की जनता को मिलने जा रही है। पंडरा, आईटीआई की ओर से रातू रोड आने वाले लोगों को सुबह एवं शाम को जाम के कारण आधे से एक घंटे तक का समय लगता था। अब जिन्हें पिस्का मोड़ से रातू रोड, कचहरी रोड या कांके रोड जाना है, वे नागा बाबा खटाल तक की दूरी केवल सात मिनट में पूरी कर सकेंगे। इससे रातू रोड की एक लाख से अधिक की आबादी को भी राहत मिलेगी। 26 महीनों में बनकर तैयार हुआ फ्लाइओवर रांची के व्यस्ततम इलाकों में शामिल रातू रोड पर ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के उद्देश्य से 3.57 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर अब पूरी तरह बनकर तैयार है। इसका निर्माण नवंबर 2022 में शुरू हुआ था और इसे जनवरी 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि जमीन अधिग्रहण और तकनीकी कारणों से इसमें चार महीने का अतिरिक्त समय लग गया। यह प्रोजेक्ट कुल 26 महीनों में पूरा हुआ। इस फ्लाईओवर को NHAI ने तैयार कराया है, जबकि निर्माण कार्य की जिम्मेदारी केसीसी बिल्डकॉन को सौंपी गई थी। परियोजना पर कुल 400 करोड़ रुपए खर्च हुए, जिसमें जमीन अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग की लागत भी शामिल है। फ्लाईओवर की मजबूती का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यह 101 पिलरों पर खड़ा है। नागाबाबा खटाल से हेहल पोस्ट ऑफिस तक 37 पिलर बनाए गए हैं, वहीं पिस्का मोड़ से इटकी रोड की ओर 300 मीटर आगे तक 14 पिलर हैं। पूरे स्ट्रक्चर में कुल 102 स्लैब का उपयोग हुआ है। 600 मीटर लंबा रैंप भी इस परियोजना का हिस्सा है।

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