कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में गिरी 3 साल की चेतना का रेस्क्यू तीसरे दिन भी नहीं हो सका है। बोरवेल के समानांतर पाइलिंग मशीन से एक और गड्ढा खोदा जा रहा है। 60 फीट तक खुदाई हो चुकी है। बोरवेल और खोदे जा रहे गड्ढे के बीच करीब 20 फीट का फासला है। उत्तराखंड टनल हादसे में रेस्क्यू ऑपरेशन करने वाली रैट माइनर्स की टीम गड्ढे से बोरवेल तक हॉरिजॉन्टल खुदाई कर सुरंग बनाएगी। हुक से ऊपर खींचने के देसी जुगाड़ के फेल होने के बाद से चेतना 120 फीट पर अटकी है। करीब 150 फीट की खुदाई के बाद चेतना तक सुरंग खोदकर पहुंचने का प्रयास होगा। साथ ही एल बैंड (देसी जुगाड़) से भी चेतना को बाहर खींचने की कोशिश लगातार की जा रही है। हालांकि दिन में पाइलिंग मशीन से खुदाई के दौरान आसपास की मिट्टी ढहने के कारण साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। दरअसल, किरतपुर के बड़ीयाली की ढाणी की चेतना चौधरी सोमवार दोपहर करीब 1:50 बजे खेलते समय बोरवेल में गिर गई थी। मंगलवार सुबह से चेतना का मूवमेंट भी नहीं दिख रहा है। बच्ची के परिजनों का सब्र टूटने लगा है। वे बस यही दुआ कर रहे हैं कि उनकी बच्ची सुरक्षित बोरवेल से निकाल ली जाए। बुधवार रात को बच्ची की मां धोली देवी की तबीयत भी बिगड़ गई। सबसे पहले जानिए- कहां हुआ हादसा प्लान A और B से एक साथ काम कर रहे
एसडीएम बृजेश चौधरी ने बताया- प्लान A के तहत बच्ची को बोरवेल से ही ऊपर खींचने का काम लगातार जारी है। इसके साथ प्लान B के तहत पाइलिंग मशीन से भी लगातार सुरंग खोदने का काम हो रहा है। दोपहर में 4:30 घंटे पाइलिंग मशीन से खुदाई रोकी गई थी। इसका कारण था कि यहां मिट्टी काफी कच्ची है। खुदाई करते समय बार-बार आसपास की मिट्टी ढह रही थी। इसलिए मिट्टी को सपोर्ट देने के लिए 60-70 फीट के लाइनर बनाए गए थे। इसके बाद सुरंग बनाने का काम फिर से शुरू किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी PHOTOS…


