बीकानेर जिले में तीन सालों में अवैध खनन-निर्गमन के 148 मुकदमे हुए और 98 गाड़ियां जब्त भी की गईं, लेकिन इनमें एमई-एसएमई की ओर से एक भी कार्रवाई नहीं की गई। बीकानेर जिले में जिप्सम, बजरी-क्ले को अवैध खनन और निर्गमन होता रहा है जिससे सरकार को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान होता है। बीकानेर जिले में अवैध खनन-निगर्मन रोकने का जिम्मा सीधे तौर पर खान विभाग का है, लेकिन उसके अधिकारी फील्ड में जाकर कार्रवाई करने से कतराते हैं। ‘भास्कर’ ने पिछले तीन सालों के दौरान बीकानेर जिले में अवैध खनन और निर्गमन संबंधी पुलिस थानों में दर्ज मुकदमों की पड़ताल की तो सामने आया कि एमई-एसएमई की ओर से फील्ड में जाकर कार्रवाई नहीं की जाती। वे अपने कार्यालयों में ही जमे रहते हैं। तीन सालों में खाजूवाला, बज्जू, रणजीतपुरा, पूगल, दंतौर, जामसर, गजनेर सहित अनेक पुलिस थानों में 148 मुकदमे दर्ज हुए जो फोरमैन या पुलिसकर्मियों की ओर से दर्ज कराए गए हैं। ऐसे भी मामले हैं जिनमें खातेदार की भूमि पर अवैध खनन हुआ और उसने मुकदमा दर्ज कराया। लेकिन, एमई-एसएमई की ओर से पुलिस थानों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं है। पुलिस की ओर से 98 वाहन भी जब्त किए गए हैं। लेकिन, एमई-एसएमई ने एक भी गाड़ी नहीं पकड़ी। जबकि, खान निदेशालय के निर्देश हैं के अधिकारी फील्ड में जाकर कार्रवाई करेंगे। अवैध खनन-परिवहन में 130 गिरफ्तार : जिले में तीन सालों के दौरान 148 मुकदमों में 130 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 99 मुकदमों में आरोप प्रमाणित मानकर कोर्ट में चालान पेश किया और 49 मामले झूठे भी माने। इस दौरान 30 ट्रैक्टर ट्राली, 50 डंपर-ट्रोला और ट्रक, 7 एचईएमएम मशीन, 11 अन्य मशीनें जब्त की गईं। हजारों टन जिप्सम, बजरी, क्ले बरामद किया गया। जिप्सम, बजरी और क्ले का हुआ अवैध खनन, 98 गाड़ियां जब्त करने की कार्रवाई भी हुई, लेकिन बीकानेर जिले में अवैध खनन और निर्गमन के मुकदमों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष, 22 में 37, 23 में 47 और 24 में 64 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें 99 लोगों में 45, 29 और 56 लोगों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन सजा एक को भी नहीं मिली। क्योंकि, अवैध खनन-निर्गमन के मुकदमों में कोर्ट में पैरवी के लिए खान विभाग पूरी तरह सरकारी वकीलों में निर्भर है। महकमे की ओर से कोर्ट में गंभीरता से पैरवी करने के लिए प्राइवेट वकील नियुक्त नहीं हैं।


