बीजापुर में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति के तहत साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 30 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। यह घटना महामहिम राष्ट्रपति महोदया के बस्तर आगमन के अवसर पर हुई। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों में 20 महिला और 10 पुरुष माओवादी शामिल हैं। इन पर पद और संगठनात्मक भूमिका के अनुसार कुल 85 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इन सभी ने सशस्त्र हिंसा का परित्याग कर शांति, संवाद और विकास के मार्ग को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। 30 माओवादी कैडरों ने बीजापुर पुलिस के सामने किया सरेंडर इन 30 माओवादी कैडरों ने 7 फरवरी 2026 को उप पुलिस महानिरीक्षक (केरिपु ऑप्स) बीजापुर सेक्टर बी.एस. नेगी और पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पित कैडरों में कंपनी नंबर 2 और 7 के सदस्य, एक पीपीसीएम, चार एसीएम, 17 पार्टी सदस्य, एक डीएकेएमएस अध्यक्ष, एक केएएमएस अध्यक्ष और तीन जनताना सरकार अध्यक्ष शामिल हैं। पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान इन कैडरों ने स्वेच्छा से एक बंडल कार्डेक्स वायर और 50 जिलेटिन स्टिक सुरक्षा बलों को सौंपे। आत्मसमर्पित सभी 30 कैडरों के समाज में पुनर्वास और पुनर्समावेशन के लिए आवश्यक विधिक प्रक्रिया जारी है। शासन द्वारा प्रत्येक कैडर को 50,000 रुपए की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। 2024 से अब तक कुल 918 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौटे बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान के तहत 01 जनवरी 2024 से अब तक कुल 918 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इसी अवधि में 1163 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 232 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं। इस आत्मसमर्पण में डीआरजी, जिला बल, एसटीएफ, छसबल, कोबरा बटालियन (201, 202, 206, 210) और केरिपु की विभिन्न बटालियनों की सक्रिय भूमिका रही। सुरक्षा बलों के निरंतर अभियान, विश्वास निर्माण और संवेदनशील व्यवहार ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है।


