33वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय थ्रोबॉल चैंपियनशिप में झारखंड की बेटियों ने जीता कांस्य पद​क

झारखंड की बेटियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रोशन किया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित स्कॉलर पब्लिक स्कूल में 26 से 28 दिसंबर तक आयोजित 33वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय थ्रोबॉल चैंपियनशिप में झारखंड की बालिका थ्रोबॉल टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि खिलाड़ियों के अनुशासन, जुझारूपन और कड़ी मेहनत का परिणाम मानी जा रही है। चैंपियनशिप के लीग मुकाबलों में झारखंड टीम का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। टीम ने अपने सभी लीग मैच जीतकर पुल विजेता बनने का गौरव हासिल किया। पहले मुकाबले में झारखंड ने पश्चिम बंगाल को 25-21, 25-23 से हराकर विजयी शुरुआत की। दूसरे मैच में पुडुचेरी को 25-13, 25-14 से पराजित कर टीम ने अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई। तीसरे लीग मैच में बिहार के खिलाफ झारखंड की बेटियों ने 25-18, 25-16 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में झारखंड टीम ने आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाते हुए पंजाब को 25-11, 25-16 से मात दी और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। इस मुकाबले में झारखंड की खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल और मजबूत डिफेंस का शानदार प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि पर झारखंड राज्य थ्रोबॉल संघ के अध्यक्ष वेदांत कौस्तव ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि सब-जूनियर स्तर पर बेटियों ने आत्मविश्वास, अनुशासन और जुझारूपन का बेहतरीन परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव खिलाड़ियों को भविष्य में और मजबूत बनाएगा और आने वाले वर्षों में टीम स्वर्ण पदक जीतने की क्षमता रखती है। टीम की सफलता पर राजेश गुप्ता, गोविंद झा, राजेश कुमार, जमील अंसारी, आशुतोष गोस्वामी, विश्वास उरांव, गौतम सिंह, नगीना कुमार, कीर्ति कुमार, सोनू सिंह, देवव्रत कुमार, मनीष शाहदेव, राकेश कुमार, नीतीश सिंह, सहित कई ने बधाई दी है। सेमीफाइनल में कड़ा संघर्ष, कांस्य पदक से संतोष सेमीफाइनल में झारखंड का सामना मुंबई की मजबूत टीम से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और झारखंड की बेटियों ने अंतिम क्षण तक संघर्ष किया, लेकिन 14-25, 23-25 से हार का सामना करना पड़ा। सेमीफाइनल में हार के बावजूद झारखंड टीम ने कांस्य पदक जीतकर चैंपियनशिप का समापन गौरवपूर्ण ढंग से किया। झारखंड राज्य थ्रोबॉल संघ के अध्यक्ष वेदांत कौस्तव ने टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि सब-जूनियर वर्ग में खिलाड़ियों ने जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता का परिचय दिया है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि यह कांस्य पदक संघर्ष, अनुभव और सीख का प्रतीक है और आने वाले वर्षों में यही खिलाड़ी झारखंड को स्वर्ण पदक दिलाने की पूरी क्षमता रखती हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *