बाड़मेर | जज्बा अगर नेक हो, तो संसाधन कभी आड़े नहीं आते। बाड़मेर के गडरारोड क्षेत्र के रहने वाले मुराद अली खानियानी पिछले 11 वर्षों से मानवता की सेवा में जुटे हैं। जोधपुर में एक दशक तक मरीजों की मदद करने के बाद अब मुराद ने अपने गांव में वसीम मानव सेवा संस्थान के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में नई अलख जगाई है। मुराद अली ने सेवा कार्य की शुरुआत जोधपुर से की। वहां उन्होंने बाड़मेर और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए रहने-खाने की व्यवस्था, बड़े डॉक्टरों से मिलवाने और रक्तदान दिलाने का काम किया। कोविड काल में जब जोधपुर शहर की बसें बंद थीं, तब वे पैदल चलकर मरीजों की मदद करने अस्पताल पहुंचते थे। उनके पिता हबीब खान खानियानी ने भी कोविड के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर गांव व आसपास के लोगों को बाड़मेर जिला अस्पताल पहुंचाया। अब एक साल से गांव में एंबुलेंस सेवा शुरू की है। यह आसपास के गांवों के मरीजों को गडरारोड, गागरिया सहित बाड़मेर जिला अस्पताल पहुंचाने का काम कर रही है। इस सप्ताह… वसीम मानव सेवा संस्थान संस्थान से 360 युवा सदस्य जुड़े हैं, जो सोशल मीडिया पर एक मैसेज मिलते ही एंबुलेंस सेवा के साथ आर्थिक सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। मुराद को उनके कार्यों के लिए बाड़मेर गौरव सम्मान और मुस्लिम समाज समिति की ओर से सम्मानित किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्र में भी उनकी एंबुलेंस और वाहन सेना की मदद के लिए तत्पर हैं। खानियानी, मेघवालों की बस्ती, धामड़ली सहित आसपास के गांव के मरीजों को गडरारोड, राणासर, गागरिया तथा बाड़मेर जिला अस्पताल तक एंबुलेंस से पहुंचाने का काम कर रहे है। एंबुलेंस एक होने के कारण जरूरत पड़ने पर संस्था निजी वाहनों (बोलेरो कैंपर) को भेजकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का कार्य कर रही है। हाल ही में तालाब में डूब रहे तीन बच्चों में से दो को समय पर अस्पताल पहुंचाकर जिंदगी बचाई। एक साल में 263 से अधिक मरीजों को निशुल्क सेवा मिली। एंबुलेंस सेवा के लिए वसीम मानव सेवा संस्थान, मोबाइल: 9256133978 संपर्क करें:


