रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) के यूजी-पीजी का शैक्षणिक सत्र सबसे ज्यादा लेट चल रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्नातक कोर्स चार साल का है। इसमें छात्रों को आठ सेमेस्टर की परीक्षा पूरी करनी है। इसके फर्स्ट बैच के स्टूडेंट्स की स्थिति चिंताजनक है। इस बैच का रिजल्ट जून 2026 तक आना है। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी अब तक सिर्फ चार सेमेस्टर का रिजल्ट हो पाया है। अब महज नौ महीने में चार सेमेस्टर की परीक्षा और रिजल्ट जारी करना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। अभी सेशन करीब 15 महीने लेट चल रहा है। इससे यूनिवर्सिटी के यूजी-पीजी के करीब 1.20 लाख स्टूडेंट्स प्रभावित हो रहे हैं। असर…सत्र लेट होने से एडमिशन के साथ नौकरी में भी दिक्कत 1 दूसरी जगह एडमिशन नहीं :यहां जब तक स्नातक फाइनल का रिजल्ट घोषित होगा, तब तक सभी विश्विवद्यालयों में पीजी में एडमिशन का समय खत्म हो जाएगा। यही नहीं, पीजी फर्स्ट सेमेस्टर का रिजल्ट भी आ जाएगा। 2 बीएड में एडमिशन में दिक्कत : स्नातक फाइनल ईयर के कई स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जो जेसीईसीईबी द्वारा आयोजित बीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए हैं। लेकिन रिजल्ट में देरी से एडमिशन में दिक्कत आ रही है। 3 प्लेसमेंट पर भी असर : सत्र में देरी का असर प्लेसमेंट पर भी पड़ रहा है। प्लेसमेंट कंपनियां नियमित सेशन वाली यूनिवर्सिटी को प्राथमिकता देती है। सत्र लेट होने की तीन प्रमुख वजह 1 देर तक एडमिशन : यूजी-पीजी फर्स्ट सेमेस्टर में सितंबर-अक्टूबर तक एडमिशन हो जाना चाहिए। लेकिन आरयू में दिसंबर-जनवरी तक एडमिशन का काम चलता है। इसका सीधा असर सत्र पर पड़ता है। 2 मूल्यांकन में ज्यादा समय : राजभवन का निर्देश है कि परीक्षा खत्म होने के एक माह के भीतर रिजल्ट घोषित हो जाना चाहिए। लेकिन कॉपियों की जांच में अधिक समय लगता है। इसका भी सत्र पर असर पड़ता है। 3 शिक्षकों की कमी : आरयू में शिक्षकों की भारी कमी है। पिछले साल से नियुक्ति नहीं हुई है। इसके कारण कॉपियों को दूसरे विश्वविद्यालय या दूसरे राज्यों में मूल्यांकन के लिए भेजा जाता है। यह भी देरी का कारण है। और दो सत्र का हाल जानिए… {स्नातक सेशन 2022-26 : इस बैच का फाइनल रिजल्ट जून 2026 में आ जाना चाहिए। लेकिन सवा तीन साल बीतने के बाद अभी फोर्थ सेमेस्टर का ही रिजल्ट आया है। अब नौ महीने में चार सेमेस्टर पूरा करना है, जो संभव नहीं है। {पीजी सेशन 2024-26 : इस बैच का भी एक साल से अधिक समय बीत गया है। लेकिन अभी फर्स्ट सेमेस्टर की ही परीक्षा हुई है। रिजल्ट अभी नहीं आया है। सेशन नियमित रहता तो अब तक सेकेंड सेमेस्टर का रिजल्ट घोषित हो जाता। केके नाग, पूर्व कुलपति आरयू वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है शिक्षकों के खाली पद भरे जाएं तभी नियमित होगा शैक्षणिक सत्र रांची यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की भारी कमी है। परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पर्याप्त शिक्षकों की जरूरत होती है, जो है नहीं। शिक्षकों के पद तो सृजित हैं, लेकिन खाली पड़े हैं। शिक्षकों के खाली पदों को भरे बिना न तो सेशन नियमित हो सकता है और न ही स्टूडेंट्स को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही दी जा सकती है। अगर सेशन को नियमित करना है तो शिक्षकों के खाली पद भरने होंगे। रांची यूनिवर्सिटी में 15 महीने लेट चल रहा यूजी और पीजी का सेशन, 1.20 लाख स्टूडेंट्स हो रहे हैं प्रभावित


