गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर निकली रैली में बुधवार को भारी हंगामा हो गया। दोपहर 12 बजे गैस पीड़ितों के 4 संगठनों की रैली में दो पुतले लाए गए थे। एक एंडरसन के तौर पर और दूसरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी वेशभूषा में तैयार किया गया था। पुतले भोपाल टॉकीज से ठेले पर ले जाए जा रहे थे। संघ जैसी वेशभूषा का पुतला देखते ही भाजपा कार्यकर्ता भड़क गए। मंडल अध्यक्ष आशीष सिंह सहित कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भाजपा वालों ने सवाल उठाया- आरएसएस वालों का पुतला जलाओगे? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? इसी को लेकर नोकझोंक बढ़ी और करीब एक घंटे तक माहौल तनावपूर्ण रहा। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया, पुतला जब्त किया और रैली रोक दी। रैली की शर्तों के उल्लंघन पर गैस पीड़ित संगठन की रचना ढींगरा समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। 41 साल में पहली बार गैस बरसी की रैली ऐसे विवाद में घिरी। गलती से नहीं बना, फोटो देकर बताया था- ऐसा बनाना है पुतला गैस पीड़ित संगठनों की रैली में आरएसएस की वेशभूषा वाला पुतला कोई गलती नहीं थी। इन संगठनों ने पुतला बनाने वाले को बाकायदा फोटो देकर संघ की वेशभूषा वाला पुतला बनाने को कहा था। दरअसल एक दिसंबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में गैस पीड़ितों के चारों संगठनों ने न्याय न मिलने का ठीकरा केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों पर फोड़ा था। रशीदा बी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों ने चार दशक पीड़ितों को धोखा दिया। बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि आडवाणी ने 2002 में गंभीर धाराएं कम करने को कहा था। रचना ढींगरा ने इलाज-पुनर्वास को सबसे खराब बताया। हालांकि, एफआईआर के बाद रचना ढींगरा ने सफाई दी कि एक पुतला डाउ केमिकल और यूनियन कार्बाइड और दूसरा इन्हें सहयोग करने वालों का था। हमने किसी एक इंसान नहीं, बल्कि प्रतीक के रूप में पुतले बनवाए थे।


