पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल के चुने जाने वाले 25 सदस्यों के लिए चुनाव 17 और 18 मार्च को होने हैं। इसके लिए उम्मीदवार और कई एडवोकेट चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग शहरों में जाकर एडवोकेट्स को अपने पक्ष में करने के प्रयास कर रहे हैं। शनिवार को उम्मीदवार और हाईकोर्ट एडवोकेट गुरिंदर सिंह सूद अमृतसर बार काउंसिल के दफ्तर पहुंचे। सूद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल के चुनाव करवाने के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया है, क्योंकि बार–बार चुनाव की तारीख आगे बढ़ाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि काउंसिल के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 2018 से 2023 तक था, लेकिन चुनाव न होने के कारण वे अब तक पद पर बने हुए हैं। सूद ने कहा कि काउंसिल का प्रमुख कार्य एडवोकेट्स की भलाई सुनिश्चित करना है, लेकिन अब तक किसी ने यह दायित्व सही तरीके से नहीं निभाया। उन्होंने वादा किया कि उनके चुने जाने पर हर एडवोकेट के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही जूनियर एडवोकेट्स के लिए स्टाइपेंड की योजना लागू करवाई जाएगी, ताकि न्याय व्यवस्था की पवित्रता बनी रहे। उन्होंने कहा कि यदि स्टाइपेंड नहीं मिला तो ईमानदार युवा एडवोकेट इस प्रोफेशन को छोड़ देंगे। सूद ने कहा कि वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की वर्तमान प्रक्रिया काफी कमजोर है। कोई भी बिना सबूत के शिकायत कर देता है, जिससे एडवोकेट्स को चंडीगढ़ के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वे ऐसा नियम बनवाएंगे, जिसमें शिकायत के साथ ठोस सबूत पेश करना अनिवार्य होगा। काउंसिल इन सबूतों की समीक्षा करके ही समन जारी करेगी। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत शिकायतें बिना आधार की हैं। सूद ने कहा कि वर्ष 2018 में नामांकन फीस 25 हजार रुपए थी, लेकिन इस बार इसे सवा लाख रुपए कर दिया गया है, जो गलत है। इससे चुनाव में पैसा प्रधान बनेगा, प्रतिस्पर्धा घटेगी और पूंजीवाद को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल और हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी (फेज थ्री-सी, चंडीगढ़) को एक लिखित मेमोरेंडम सौंपा है, जिसमें नामांकन फीस 10 हजार रुपए करने की मांग की गई है। सूद का कहना है कि फीस का उद्देश्य उम्मीदवार को गंभीर बनाना होना चाहिए, न कि आर्थिक दीवार खड़ी करना। ज्यादा फीस से युवा और साधारण पृष्ठभूमि के वकील चुनाव से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल जैसे निकाय में हर वर्ग के वकील की भागीदारी जरूरी है, तभी यह संस्था वास्तविक रूप से प्रतिनिधिक निकाय बन पाएगी। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार मतदान 17 मार्च को चंडीगढ़ में और 18 मार्च को पंजाब व हरियाणा के जिलों में होगा। नामांकन, जांच और वोटिंग की पूरी प्रक्रिया 2025 के अंत से लेकर मार्च 2026 तक चलेगी। जानकारी देते हाइकोर्ट में एडवोकेट गुरिंदर सिंह सूद, साथ हैं अन्य।


