राजधानी जयपुर में लिटरेचर फेस्टिवल से पहले आज एजुकेशन समिट का आगाज हो गया है। जयपुर के एस. एस . जैन सुबोध कॉलेज में आज सबमिट के पहले दिन पद्मश्री सुंदर राम वर्मा और पद्मश्री जगदीश प्रसाद पारीक ने समिट का उद्घाटन किया। इस दौरान शुरुआती सत्र में भारत की शिक्षा नीति के साथ ही ऑनलाइन-ऑफलाइन एजुकेशन सिस्टम और शिक्षण क्षेत्र में किया जा रहे नवाचार पर मंथन किया गया। आज समिट के पहले सत्र में विद्यार्थी जीवन में गीता का महत्व पर चर्चा की गई। जिसमें वक्ताओं ने गीता के श्लोकों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। इसके बाद किसानों की खुशहाली का शंखनाद विषय पर किसान वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। इस दौरान पद्मश्री सुंदराम वर्मा ने कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। हमें उनके लिए ऐसी शिक्षा और तकनीक विकसित करनी होगी, जो उन्हें आत्मनिर्भर बना सके। वहीं पद्मश्री जगदीश प्रसाद पारीक ने जैविक खेती और नवाचार पर जोर दिया। जबकि प्रोफेसर बलराज सिंह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं है। बल्कि, समाज और देश के विकास में योगदान देना होना चाहिए। इसको लेकर रीति नीति तैयार होनी चाहिए। इसके साथ ही समिट के पहले दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मानसिक स्वास्थ्य, और डिजिटल युग में सफलता के लिए जरूरी स्किल्स जैसे कई विषयों पर आज विषय विशेषज्ञों द्वारा चिंतन और मंथन किया गया। जयपुर एजुकेशन समिट के आयोजक सुनील नारनौलिया ने कहा यह समिट शिक्षा और समाज के बीच पुल बनाने का काम करेगा। शिक्षा के क्षेत्र में समिट में उठाए गए मुद्दे आने वाले समय में बड़े बदलाव का कारण बन सकते हैं। बता दें कि 5 दिन तक चलने वाली इस समिट में देशभर के शिक्षाविद, किसान, छात्र और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों और बदलाव को लेकर अलग-अलग सेशन में चर्चा की जा रही है। जिसमें देश और दुनिया के 500 से ज्यादा शिक्षाविद प्रबुद्धजन और राजनेता हिस्सा लेंगे। इसके बाद समिट के दौरान हुए सत्रों का मसौदा सरकार को भेजा जाएगा।


