शिवपुरी की बदरवास जनपद की इचोनिया पंचायत में 50 आदिवासी परिवारों का जन-मन आवास का सपना अधर में लटक कर रह गया है। परिवारों को जनमन आवास के तहत कुटीर स्वीकृत हो गई थी। सभी ने बैंक खातों में आई पहली किस्त की राशि से निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया, लेकिन वन विभाग ने जंगल की जमीन बताते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। इसके चलते सभी 50 जन-मन आवास के निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। इचोनिया पंचायत के भिलारी गांव के मजरा ढेरापुरा के रहने वाले कैलाश आदिवासी ने बताया कि करीब 50 वर्षों से आदिवासियों के परिवार मजरा ढेरापुरा में निवास करते हुए आ रहे हैं। करीब 50 आदिवासी परिवारों को जन-मन आवास के तहत कुटीर स्वीकृत हुई थी। सभी परिवारों के खाते में आवास की पहली किस्त डाली गई थी। पहली किस्त की राशि से आवास का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया था, लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों ने फॉरेस्ट की जमीन बताते हुए निर्माण कार्य को रुकवा दिया है। लाड़कुंअर आदिवासी ने बताया कि उक्त भूमि पर पिछले पचास सालों से कच्चे मकान में रहते हुए आ रहे थे, लेकिन जब पक्के आवास का सपना पूरा होने को आया तब वन विभाग द्वारा जमीन को अपना बताया जा रहा है। लोगों का आरोप- वन विभाग ने बरती लापरवाही बता दें कि जिस जमीन को वन विभाग अपनी बता रहा है, उस जमीन पर आदिवासी परिवार पिछले 50 सालों से निवास करते आ रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि जमीन से हटने के लिए कभी भी वन विभाग द्वारा नहीं कहा गया। वहीं जब जन-मन आवास का निर्माण कार्य कराया तब वन विभाग की ओर से फॉरेस्ट की जमीन बताई जा रही हैं। वहीं आदिवासी परिवारों को स्वीकृत हुए आवास के पहले जियो टैंगिंग वन विभाग की जमीन पर कर दी गई।


