50 के पास ही फायर एनओसी:शहर में 5000 लॉज व हॉस्टल, 350 हॉस्टल व लॉज ही रजिस्टर्ड

3 फीट चौड़ी गली में घर में खोल दिए हॉस्टल
शहर में 5000 से ज़्यादा लॉज व हॉस्टल चल रहे हैं। बिल्डिंग व घरों में सभी नियमों को तोड़कर हॉस्टल और लॉज खोल दिए गए हैं। एक-एक बिल्डिंग में 400 से ज़्यादा बेड का हॉस्टल बना दिया गया है। लॉज व हॉस्टल बनाने से पहले सभी नियमों की अनदेखी की गई है। आँकड़ों के अनुसार, 350 हॉस्टल व लॉज रजिस्टर्ड हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने शुक्रवार को शहर के प्रमुख जगहों पर हॉस्टल व लॉज की पड़ताल की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। थड़पखना में लड़कियों के लिए 8 हॉस्टल ऐसी जगह चल रहे हैं, जहाँ आने-जाने के लिए मात्र तीन फीट की गली है। आग लगने की स्थिति में इन हॉस्टल व लॉज तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुँचने की कोई संभावना नहीं है। इन हॉस्टल संचालकों ने न तो फायर एनओसी ली है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। हॉस्टल के गेट पर सीसीटीवी कैमरे तो लगाए गए हैं, लेकिन कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किया गया है। ऐसे में गर्ल्स हॉस्टल व लॉज में कभी भी कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश कर सकता है। स्टेट फायर ऑफिस में दर्ज आँकड़ों पर गौर करें, तो शहर में 50 से भी कम लोगों ने फायर एनओसी ली है। ऐसे में अगर इन जगहों पर आग लगने की घटनाएँ होती हैं, तो तत्काल नियंत्रण पाना मुश्किल होगा। 3 स्थानों पर हॉस्टल की व्यवस्था से समझिए स्थिति… सुरक्षा के नाम पर सिर्फ सीसीटीवी, गार्ड तक नहीं इधर, लॉज और हॉस्टल का सुरक्षा ऑडिट करेगी पुलिस
पुलिस अब लॉज व हॉस्टल में उपलब्ध सुरक्षा की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके लिए शहर के सभी थानेदारों को विशेष निर्देश दिया गया है। कमर्शियल इस्तेमाल होने वाले सभी घर व भवन मालिकों को थाने को यह जानकारी देनी होगी कि कितने सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसके अलावा फायर एनओसी है या नहीं। सुरक्षा के क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं। कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे भवन मालिकों को निबंधन कराना अनिवार्य होगा। फायर एनओसी लेने से पहले एडवाइजरी ज़रूरी: ऑफिसर
स्टेट फायर ऑफिसर जितेंद्र तिवारी ने कहा है कि हॉस्टल व लॉज संचालकों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। इससे पहले फायर एडवाइजरी लेनी होगी, जिसमें ऑडिट कर बताया जाएगा कि सेफ्टी के लिए कौन-कौन से उपकरण लगाने होंगे। लोगों ने न फायर एडवाइजरी ली, न ही फायर एनओसी। सुरक्षा के मानक तय, लेकिन अधिकतर हॉस्टल में पालन नहीं
सुरक्षा के मानक तय हैं, पर अधिकतर हॉस्टल संचालक इन मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। लालपुर स्थित लोअर वर्दवान कंपाउंड, धोबीघाट मोहल्ला, नगड़ाटोली, थड़पखना समेत कई जगहों पर चल रहे हॉस्टल और लॉज में आने-जाने के लिए दो फीट से भी कम चौड़ा रास्ता है।

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