भास्कर न्यूज | पांडातराई माघी पूर्णिमा पर डोंगरिया में मेला लगेगा। यहां फोंक नदी के बीच शैल खंड में स्वयंभू शिवलिंग जालेश्वर महादेव विराजमान हैं। इस अनोखे शिवलिंग की महिमा अद्भुत मानी जाती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाने और मनोकामना पूर्ति के लिए पहुंचते हैं। डोंगरिया जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर है। यह कवर्धा-बिलासपुर मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग 130 पर पांडातराई के पास स्थित है। डोंगरिया मेला फोंक नदी के किनारे आम बगीचे की छांव में लगता है। यह स्थल डोंगरिया, खरहट्टा और नवागांव की त्रिकोणीय सीमा में स्थित है। यहां नदी के बीच करीब 50 फीट गहराई में शिवलिंग स्वरूप शैलखंड मौजूद है। 2002 से संत अमरपुरी महाराज ने यहां 12 वर्षों तक अखंड धुनी तपस्या की। अब यहां भव्य आश्रम बना है। सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मेला स्थल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। शोधकर्ता देवचरण ने बताया कि पुराने समय में फोंक नदी का प्रवाह खरहट्टा से भरेली की ओर था। डोंगरिया में तब एक छोटा नाला बहता था, जिसे सनबोरवा नरवा, कहा जाता था। अकाल के वक्त पानी की किल्लत हुई तो गांववालों ने खरहट्टा के पास से फोंक नदी का पानी इस नाले में मोड़ दिया। राजा को भारी जुर्माना देना पड़ा। धीरे-धीरे यह नहर नदी का रूप ले गई और पुराना प्रवाह विलुप्त हो गया।


