इंदौर के राजमोहल्ला स्थित परसरामपुरिया स्कूल के पूर्व छात्रों का मिलन समारोह खंडवा रोड स्थित एक फार्म हाउस पर आयोजित किया गया। इस खास मौके पर 50 साल पहले एक साथ पढ़ने वाले दोस्त एक बार फिर मिले। आधी सदी के अंतराल के बाद जब पुराने मित्र एक-दूसरे से मिले, तो पहले उन्हें एक-दूसरे को पहचानने में थोड़ी मुश्किल हुई। समय के साथ बदले चेहरों और व्यक्तित्व के कारण कुछ दोस्तों को पहचानने में 5-7 लोगों को मिलकर भी दिमाग लगाना पड़ा। लेकिन जैसे ही किसी दोस्त की पहचान हुई, वैसे ही खुशी से एक-दूसरे को गले लगाया। कार्यक्रम के दौरान जब सभी मित्र एक साथ बैठे और पुरानी यादों को ताजा करने लगे, तो मानो वक्त थम सा गया। स्कूल के दिनों की यादें, शरारतें और वो पुराने किस्से-कहानियों ने माहौल को 50 साल पहले के समय में पहुंचा दिया। इस मिलन समारोह ने साबित कर दिया कि दोस्ती के रिश्ते समय और उम्र की सीमाओं से परे होते हैं। परसरामपुरिया विद्यालय के पूर्व छात्रों का यह मिलन समारोह में स्कूल प्रबंध समिति के वर्तमान अध्यक्ष रामदास गोयल, ट्रस्टी शरद गोयल, पूर्व प्राचार्य के.सी. मित्तल, ओ.पी. सिंघल एवं प्रो. धन्नालाल चौधरी, रामबाबू अग्रवाल के आतिथ्य में आयोजित किया गया। 50 वर्ष पूर्व कक्षा छठी से दसवीं तक के छात्र रहे अब कहीं डॉक्टर बन गए हैं तो कहीं इंजीनियर, कुछ वकील, उद्योगपति और अन्य व्यवसाय में भी जुटे हुए हैं। इनमें अमेरिका से आए किरीट शाह, मुंबई से राजेन्द्र अग्रवाल, जबलपुर से राजकुमार और आसपास के अन्य शहरों से आए छात्र भी लम्बे अर्से बाद एक-दूसरे से मिले।पूर्व छात्रों के बीच इस सम्मेलन के कर्ताधर्ता पाकीजा ग्रुप के मकसूद गौरी एवं इकबाल गौरी की इच्छा थी कि अपने सभी बचपन के सहपाठियों को बुलाकर एक कार्यक्रम आयोजित किया जाए। लम्बी मशक्कत के बाद करीब 100 छात्रों के नाम, पते और सम्पर्क सूत्र मिले और इस तरह इन सब बचपन के मित्रों का यह स्नेह मिलन समारोह पूरी धूमधाम के साथ आयोजित हुआ। इस मौके पर कार्यक्रम का संचालन कमल गुप्ता एवं हरि अग्रवाल ने किया। अतिथियों का स्वागत जवाहर सांड, अनिल नीमा, गिरीराज मित्तल, मनोहर बंसल, जौहर अली बोहरा, शिशिर बसेर, गोपाल कसेरा, सुरेश काला आदि ने किया। स्वागत उदबोधन मकसूद भाई गौरी ने दिया। अतिथियों में स्कूल प्रबंधन समिति के वर्तमान अध्यक्ष रामदास गोयल एवं पूर्व प्राचार्य के.सी. मित्तल ने कहा कि पुराने छात्रों के मिलन समारोह से जहां पुरानी यादें ताजा होती हैं, वहीं शिष्य की उन्नति से गुरू का मान भी बढ़ता है। सभी छात्रों ने एक स्वर से संकल्प व्यक्त किया कि वे जहां भी रह रहे हैं, माह में एक बार पीड़ित मानवता की सेवा का कोई भी प्रकल्प जरूर चलाएंगे। कुल मिलाकर परसरामपुरिया के इन पूर्व छात्रों ने पांच दशक पहले के उस बचपन को बहुत शिद्दत से जीवंत किया। एक-दूसरे के हाल चाल से लेकर घर-परिवार और कारोबार के बारे में भी सूचनाओं का आदान-प्रदान तो हुआ ही, आगे की योजनाओं और मेल-मुलाकात पर भी कच्चे-पक्के वादे हुए। आभार माना इकबाल गौरी ने।


