प्रदेश में 56 बाघों की मौत के बाद अब वन विभाग ने सभी वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में आपरेशन वाइल्ड ट्रेप-2 चलाने का फैसला किया है। यह आपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 जब तक चलेगा तब तक फील्ड अफसरों को क्षेत्र में सघन गश्त करना होगी। आपरेशन 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान शिकार की स्थिति पाए जाने पर सख्त कार्यवाही के लिए कहा गया है। वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े द्वारा इसको लेकर जारी निर्देश में कहा गया है कि हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल में एक उपवन मंडल स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी हर सप्ताह वन मुख्यालय को जानकारी भेजेगा। ऑपरेशन वाईल्ड ट्रैप एक माह पांच दिन तक चलेगा। इस दौरान सभी वन मंडल इकाइयों में सघन गश्ती दिन और रात्रि में की जाएगी। सप्ताह में कम से कम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ अधिकारी गश्त करेंगे। साथ ही हफ्ते में दो दिन वन मंडल अधिकारी और उप वन मंडल अधिकारी तथा एक दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक अनिवार्य रूप से गश्त करेंगे। गश्त को लेकर ये निर्देश प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व, 11 परियोजना मंडल सभी मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक, क्षेत्रीय क्षेत्र संचालक संचालक टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक वन विकास निगम, वन मंडल अधिकारी तथा संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम को जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं। ऐसे इलाकों में शिकारी और मांस के शौकीन लोगों द्वारा शिकार के जो तरीके अपनाए जाते हैं उससे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू आदि भी शिकार हो जाते हैं। विभागीय पोर्टल में दर्ज शिकार के प्रकरणों का विश्लेषण करने पर पाया गया है कि वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे एवं विद्युत लाइन में तार फंसाकर शिकार से संबंधित कुल 933 प्रकरण दर्ज किए गए हैं जिसमें 322 जंगली सुअर,118 नीलगाय, 101 तेंदुआ, 82 चीतल, 50 सांभर, 36 भालू, 39 बाघ एवं 17 राष्ट्रीय पक्षी मोर शामिल हैं। इस तरह की घटनाएं ठंडी के मौसम में अधिक होती हैं। इसलिए 1 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक ऑपरेशन वाईल्ड ट्रैप संचालित किया गया था जिसमें 931 प्रकरण दर्ज किए गए और 429 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मप्र में 2025 में 56 बाघों की मौत, 36 के शिकार की आशंका


