शुभ और सौम्य योग के संयोग में 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ होगा, जो 119 दिन का होगा। इस एकादशी को समस्त जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु जी की विधिवत पूजा कर शयन कर दिया जाता है। चातुर्मास में श्री विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। पंडित प्रणव मिश्रा ने कहा कि इस काल में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं। कार्तिक माह के देव प्रबोधिनी एकादशी के बाद शुभ और मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं। चातुर्मास में ही श्रावण माह है, जो भोलेनाथ का प्रिय माह है। यह माह भगवान शिव को समर्पित है। इनकी उपासना से सुख-समृिद्ध, विवाह, आयु, आरोग्य की प्राप्ति होगी। इस मास में बाबा को रुद्राभिषेक का महत्व कई गुणा अधिक हो जाता है। आचार्य पंडित श्याम सुंदर भारद्वाज ने बताया कि देवशयनी एकादशी का आरंभ 5 जुलाई को शाम में 6.59 बजे होगा और 6 जुलाई को रात में 9.16 बजे तक एकादशी रहेगी। उदयातिथि में होने से एकादशी व्रत किया जाएगा। श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर के महंत ओम प्रकाश शरण ने कहा कि इस दिन शालिग्राम जी का अभिषेक पंचामृत से करें। गंगाजल से शालिग्राम जी का अभिषेक करें। साथ ही पीले वस्त्र अर्पित करें। शालिग्राम जी का शृंगार करें। फूल, फल, धूप, कपूर, नैवेद्य आदि अर्पित करें। पंचामृत और पंजीरी का भोग अर्पित करें। आरती कर पूजा को संपन्न करें।


