65 लाख की कार चलाने वाला मांग रहा था भीख:16 लोगों को कुचलने वाला पुलिस से बचने के लिए पैदल चला, गंगाघाट पर गुजारीं रातें

जयपुर में 9 जनवरी को ऑडी से 16 लोगों को रौंदने वाले दिनेश रिणवां को पुलिस ने घटना के 9 दिन बाद बदहवास हालत में गिरफ्तार कर लिया। 65 लाख रुपए की ऑडी और 40 लाख की फॉर्च्यूनर से चलने वाला दिनेश रिणवां पुलिस से बचने के लिए कई किमी पैदल चला। भूखा रहा। अक्सर जिन होटलों में रुकता था, उन होटल मालिकों ने उसे ठहराने से इनकार कर दिया। राहगीरों को 100 रुपए देकर 10 मिनट के लिए उनका मोबाइल लेता ताकि अपने बारे में चल रही खबरें देख सके। पैसे खत्म हुए तो लोगों से भीख मांगी। दिनेश ने पुलिस को पिछले 9 दिन तक फरारी की पूरी कहानी सुनाई। पढ़िए यह रिपोर्ट… पुलिस पूछताछ में दिनेश ने बताया- वह दोपहर से ही शराब पी रहा था। शाहपुरा में जमीन देख कर आते समय कूकस से 2500 रुपए की शराब खरीदी और पीने लगा। इसके बाद दोस्तों के साथ टेस्ट ऑफ राजस्थान गया। वहां भीड़ अधिक होने पर दोस्तों के साथ कार से आगे बढ़ा। 110 किमी की स्पीड से ऑडी दौड़ाई। 16 लोगों को कुचलने के बाद गाड़ी रुकी। लोगों ने ही उसे बाहर निकाला। बाहर निकालने के बाद लोगों ने मारपीट शुरू कर दी। किसी तरह वह वहां से भाग निकलने में कामयाब हो गया। ऑटो लेकर घर पहुंचा। पैसे और कुछ कपड़े लेकर भाग गया। सुमित और नितिन मदद के लिए आए। दोनों ने अशोक को बुलाया। तीनों उसे भागचंद के यहां ले गए। वहां रात को सोया और फिर भागचंद का भाई शिवराज उसे लेकर सुबह गोनेर के लिए निकल गया। रास्ते में शिवराज के पास भागचंद का फोन आया कि पुलिस घर आई है। पुलिस का पता चलते ही दिनेश शिवराज की कार से उतर कर खेतों में भाग गया। 10 जनवरी : सुबह 8 से रात 8 बजे तक सड़क पर चलता रहा
दिनेश 10 जनवरी की सुबह शिवराज की कार से उतर कर गोनेर में खेतों में भाग गया। उसके कपड़ों का बैग कार में रह गया। दिनेश ने बताया कि उसे डर था कि पुलिस अब कभी भी पकड़ सकती है। वह ऐसे इलाकों से निकला, जहां सीसीटीवी नहीं लगे थे। वह खेतों में होता हुआ दोपहर करीब 2 बजे रिंग रोड पर पहुंचा। जहां से कानोता की तरफ चला। इस दौरान कई वाहन चालकों से लिफ्ट मांगी लेकिन किसी ने नहीं दी। इसके बाद कानोता के पास से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर चलने लगा। सुबह से चलने और खाना हाईवे पर नहीं मिलने के कारण हालत खराब हो गई। नायला के करीब दौसा के पास में हाईवे के किनारे भेड़ चराने वाले मिले, जिनसे खाना मांगा और रुकने की जगह मांगी। रात वहीं बिताने पर उन लोगों को 500 रुपए दिए। 11 जनवरी : बिहार के एक ट्रक वाले ने दी भिवाड़ी तक लिफ्ट
11 जनवरी की सुबह दिनेश 11 बजे एक्सप्रेस हाईवे पहुंचा। ट्रक वालों से लिफ्ट मांगी। दिनेश बस से भी जा सकता था, लेकिन वहां पहचाने जाने का डर था। दोपहर करीब 1 बजे बिहार के एक ट्रक ड्राइवर ने उसे लिफ्ट दी। शाम 5 बजे भिवाड़ी उतार दिया। भिवाड़ी में कई होटलों में गया लेकिन किसी ने कमरा नहीं दिया। सभी ने आईडी मांगी। आईडी और फोन नहीं होने के कारण कमरा नहीं मिला। इसके बाद हाईवे पर जाकर एक ढाबे में खाना खाया और सो गया। 12–14 जनवरी : दोस्त के होटल में नहीं मिली जगह
12 जनवरी की सुबह दिनेश उठा और ढाबे पर बैठे लोगों से मोबाइल मांगा। कुछ लोगों ने मोबाइल देने से इनकार किया तो दिनेश ने 100 रुपए में 10 मिनट मोबाइल चलाने के लिए लिया। माेबाइल पर अपने बारे में चल रही खबरें देख रहा था। तभी उसे पता चल गया कि पुलिस सरगर्मी से उसे तलाश रही है। इसके बाद दिनेश ने हरिद्वार जाने का प्लान बनाया। दिनेश रात को ट्रक से लिफ्ट लेकर 13 की सुबह हरिद्वार पहुंचा। वहां वह अपने दोस्त के होटल गया। होटल पर उससे आईडी मांगी गई लेकिन दिनेश के पास आईडी नहीं थी। दिनेश ने होटल स्टाफ को पूर्व में रुकने की तारीख बता कर आईडी उठाने की बात कही लेकिन फिर भी उसे कमरा नहीं मिला। होटल मालिक को भी कई बार फोन कराए, लेकिन साफ मना कर दिया गया। इसके बाद दिनेश गंगा किनारे पहुंचा और बिस्तर लेकर घाट पर सो गया। 14 जनवरी की सुबह 4 दिन बाद गंगा में नहाया। घाट पर ही कपड़े सुखाए। दोपहर में बाजार जाकर खाना खाया। रात को दोबारा घाट पर आकर सो गया। 15 जनवरी : सोनीपत में हुई लूटपाट, ढाबे वालों ने बचाया
15 जनवरी की दोपहर दिनेश सोनीपत (हरियाणा) के लिए बस से निकला। हुलिया और पहचान छिपाने के लिए एक मफलर भी खरीदा था। दिनेश सोनीपत में सोलर की फैक्ट्री में पहुंचा जहां से वह माल खरीदता था। वहां पहुंचने पर उसे पता चला कि उसको पकड़ने के लिए कई बार पुलिस यहां पर सर्च कर चुकी है। दिनेश समझ गया कि पुलिस लगातार उसका पीछा कर रही है। दिनेश फैक्ट्री से निकला और फिर हाईवे पर एक ढाबे पर पहुंचा। वहां कुछ बदमाशों ने उसके बाद काफी पैसे देख लिए। बदमाशों ने उसे पीटा और पैसे लेकर भाग गए। ढाबेवालों ने दिनेश को बचाया। 16 जनवरी : रात काटी ढाबे में, सुबह फ्री में मिली चाय और बिस्किट खाया
16 जनवरी की सुबह ढाबे वाले ने दिनेश को फ्री में चाय और बिस्किट दिए और वहां से जाने के लिए कहा। वह 12 बजे सोनीपत से भिवाड़ी जाने वाली बस में बैठा। कंडक्टर ने टिकट के पैसे मांगे। दिनेश के पास पैसे नहीं थे, ऐसे में उसे बस से उतार दिया। रात करीब 2 बजे लिफ्ट लेकर दिनेश भिवाड़ी पहुंचा। 17 जनवरी : भिवाड़ी में ढाबे वालों से मांगी मदद
17 जनवरी को भिवाड़ी में दिनेश ने ढाबे वालों को अलग-अलग कारण बताकर पैसा मांगा। कुछ ने भगाया और कुछ ने पैसे की मदद कर दी। इसके बाद दिनेश भिवाड़ी से जयपुर के लिए बस से रवाना हुआ। रास्ते में दिनेश ने बस में बैठे हुए व्यक्ति से मोबाइल लिया और एक्सीडेंट को लेकर चल रही खबरें देखी। दिनेश को अंदाजा हो गया था कि आज नहीं तो कल पुलिस उसे पकड़ ही लेगी। उसने फेसबुक पर अपने परिचितों से सम्पर्क किया और मदद मांगी। पुलिस को इसकी जानकारी मिल गई। पुलिस ने रिंग रोड पर दिनेश को मुख्य मार्ग पर बदहवास हालत में देख कर पकड़ लिया। पत्रकार कॉलोनी थाना सीआई मदन कड़वासरा ने बताया- इस केस में एक अन्य आरोपी मांगीलाल (उत्तर प्रदेश में AEN) फरार है। वह घटना के दौरान कार में था। वह अभी फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।

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