लाइट्स व म्यूजिक ने बांधा समां शौर्य सभागार का मंच उस वक्त जीवंत हो उठा जब गुंजन शुक्ल के मैजिकल प्रकाश संयोजन और अजय कुमार के रूहानी संगीत ने कहानी के करुण और शृंगार रस को दर्शकों के दिलों तक पहुंचाया। स्वाति दुबे और मोइन खान द्वारा डिजाइन किए गए कॉस्ट्यूम्स ने 8वीं सदी के वैभव को मंच पर साक्षात कर दिया। निर्देशक विवेक ने क्लासिक संस्कृत ड्रामा को इस तरह पेश किया कि हर युवा जुड़ा हुआ महसूस कर रहा था।
वादा और सियासत का ‘ट्विस्ट’
कहानी दो गहरे दोस्तों, भूरिवासु व देवरता के वादे से शुरू होती है, जहां वे अपने बच्चों (मालती और माधव) का विवाह करने की ठानते हैं। लेकिन जब भूरिवासु मंत्री बनते हैं, तो ‘पॉलिटिकल माइलेज’ के चक्कर में अपनी बेटी मालती का रिश्ता एक शक्तिशाली व्यक्ति नंदन से तय कर देते हैं। यहीं से शुरू होता है प्रेम और सत्ता के बीच का वो ‘भूचाल’, जो आज के दौर की ऑनर किलिंग और जबरन शादियों की याद दिलाता है।
नारी शक्ति का ‘मास्टरस्ट्रोक’
नाटक में ‘कामंदकी’ का किरदार नारी शक्ति और बुद्धिमानी का प्रतीक बनकर उभरा। उसने न केवल मालती-माधव के प्रेम का समर्थन किया, बल्कि अपनी चतुराई से सत्ता की बेड़ियों को तोड़कर प्रेम को जीत दिलाई। यह पात्र संदेश देता है कि अगर महिलाएं एकजुट हों, तो सामाजिक कुरीतियों को उखाड़ फेंका जा सकता है।
experienced by एमके पाठक नाट्य समीक्षक, रांची सिटी रिपोर्टर } ‘भारत रंग महोत्सव’ की चौथी शाम भावनाओं के नाम रही। मंच पर जब 8वीं शताब्दी के महान संस्कृत नाटककार भवभूति की कालजयी रचना ‘मालती-माधव’ का मंचन हुआ, तो दर्शकों ने सदियों पुरानी कहानी में आज के दौर के सामाजिक व राजनीतिक संघर्ष महसूस किए। एनएसडी के प्रो. विवेक इम्मानेनी के निर्देशन में सजी इस प्रस्तुति ने प्रेम, सत्ता व बलिदान के त्रिकोणीय संघर्ष को खूबसूरती से पेश किया। शृंगार रस की मिठास व करुण रस की गहराई ने दर्शकों को बांधे रखा। भारंगम


