कंपनी ने चेक को अपने बैंक के जरिए जमा कराया, लेकिन 14 फरवरी 2018 को चेक बाउंस हो गया। इसके बाद 5 मार्च 2018 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर 15 दिन में भुगतान की मांग की गई, पर न रकम दी गई और न जवाब मिला। इसके बाद अदालत में धारा 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत शिकायत दायर की गई। ट्रायल के दौरान कंपनी ने चेक, बैंक मेमो, कानूनी नोटिस, डाक रसीद और खाते का स्टेटमेंट पेश किया। आरोपी ने दलील दी कि चेक सुरक्षा के तौर पर था, उसका गलत इस्तेमाल हुआ और कोई कानूनी बकाया नहीं था। उसने क्षेत्राधिकार पर भी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर विवादित नहीं हैं, इसलिए कानून के तहत यह माना जाएगा कि चेक देनदारी के भुगतान के लिए था। आरोपी नोटिस का जवाब देने या चेक के दुरुपयोग की शिकायत करने में भी नाकाम रहा। अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए एक साल की कठोर कैद और 14,50,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। मुआवजा न देने पर 3 महीने की अतिरिक्त कैद भी होगी। सजा के बाद आरोपी को राहत देते हुए अपील दायर करने तक या 23 फरवरी 2026 तक सजा निलंबित कर दी गई है। उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर अस्थायी जमानत दी गई है। भास्कर न्यूज | लुधियाना करीब आठ साल पुराने चेक बाउंस मामले में अदालत ने एक कारोबारी को दोषी ठहराते हुए एक साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उसे शिकायतकर्ता कंपनी को 14 लाख 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया है। फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नवनीत कौर–I की अदालत ने सुनाया। मामला एम/एस क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड की शिकायत पर दर्ज हुआ था। कंपनी ने आरोप लगाया कि आरोपी प्रकाश सिदरामप्पा बिरदार, जो एम/एस सिदरामेश्वर फर्टिलाइजर्स का प्रोपराइटर है, उधार पर कीटनाशक और कृषि रसायन खरीदता था। खाते के अनुसार उस पर बड़ी रकम बकाया थी। भुगतान के लिए आरोपी ने 5 फरवरी 2018 को 14,50,000 रुपये का चेक जारी किया, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बीदर (कर्नाटक) शाखा के खाते से था।


