एम्स जोधपुर के ईएनटी विभाग ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। यहां की टीम ने महज नौ महीने की बच्ची के दोनों कानों में एक ही सत्र में कॉक्लियर इम्प्लांट लगाने में कामयाबी पाई।
अप्रैल 2025 में एमडीएम अस्पताल में जन्मी नन्ही परी को जन्म से ही सुनाई नहीं दे रहा था। माता-पिता ने उसे तुरंत डॉ. अमित गोयल के पास ले जाकर जांच कराई, जहां दोनों कानों में पूर्ण श्रवण हानि का पता चला। कम उम्र में सर्जरी की चुनौती टीम ने तय किया कि जितनी जल्दी हो सके सर्जरी करें, क्योंकि कॉक्लियर इम्प्लांट तभी सबसे असरदार होता है। डॉ. अमित गोयल ने बताया कि यह चुनौतीपूर्ण सर्जरी थी, लेकिन बच्ची के भविष्य को बदलने का सुनहरा मौका था।
इतनी छोटी उम्र में रक्त की मात्रा कम, खोपड़ी की हड्डियां नरम और त्वचा पतली होने से जोखिम ज्यादा था। बावजूद इसके, डॉ. अमित गोयल और डॉ. विधु शर्मा की अगुवाई में टीम ने सर्जरी सफल कर दी। वहीं एनेस्थीसिया से डॉ. प्रियंका सेठी ने सहयोग किया। सर्जरी के बाद बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया है। अब उसका रिहैबिलिटेशन शुरू होगा, ताकि वह सामान्य जीवन जी सके।
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने टीम को बधाई दी। कहा कि जन्म पर ही श्रवण परीक्षण और जरूरत पड़ने पर तुरंत कॉक्लियर इम्प्लांट से बच्चे सामान्य जीवन पा सकते हैं। यह सबसे प्रभावी तरीका है।


