शहर के 95 वार्डों में रहने वाले करीब 4.5 लाख प्रॉपर्टी धारकों को अब पेयजल संबंधी समस्याओं से बड़ी राहत मिलने जा रही है। नगर निगम अब वाटर सप्लाई की दिक्कतों को दूर करने के लिए निजी कंपनी की सेवाएं लेगा। दो साल के इस ऑपरेशनल और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट पर निगम करीब 90 करोड़ रुपए खर्च करेगा। यानी अब न तो वाटर सप्लाई लीकेज के लिए निगम के चक्कर काटने होंगे और न ही ट्यूबवैल बंद होने पर पानी का संकट झेलना पड़ेगा। शिकायत मिलते ही कंपनी साइट पर पहुंचेगी और समस्याओं का हल करेगी। निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल ने बताया कि इसके लिए टेंडर लगा दिया गया है। अगले महीने प्रक्रिया पूरी होते ही नियमों को पूरा करने वाली कंपनी को काम सौंप दिया जाएगा। कमिश्नर ने साफ किया कि कंपनी का रोल सिर्फ मेंटेनेंस और समस्या समाधान तक सीमित रहेगा। पानी के बिल जारी करना, बिलों की वसूली,ये दोनों काम निगम खुद करेगा। इस व्यवस्था से एक और फायदा होगा कि शहर में चल रहे अवैध कनेक्शन आसानी से पकड़ में आएंगे और चोरी पर रोक लगेगी। वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं { कंपनी कैसे काम करेगी -कंपनी की जिम्मेदारी शहर के 95 वार्डों में पेयजल सप्लाई में आने वाली हर समस्या को ठीक करना है। कंपनी चारों जोनों में अपना स्टाफ लगाएगी। कंपलेंट ऑफिस बनेगा, जिसका शिकायत नंबर जोन-वाइज होगा। कंपनी तीन शिफ्टों में शिकायतें नोट करेगी। वाट्स एप नंबर भी जारी होगा। शिकायत की हल होने तक पूरी ट्रेकिंग होगी। शिकायतकर्ता से फीडबैक भी लेना होगा। { निगम कैसे ट्रैक करेगा कि शिकायत हल हुई भी या नहीं -लुधियाना अर्बन वाटर एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट के अधिकारी मॉनीटरिंग करेंगे। कितनी शिकायतें मिली, कितने समय में हल हुई क्रॉस चैक होगा। जनता फीडबैक भी जांचेंगे। शिकायतों की रोजाना रिपोर्ट चैक होगी। समस्या को तय समय पर हल किया है या नहीं, पेमेंट इसी आधार पर की जाएगी। {क्या कंपनी जनता से पैसा लेगी -कंपनी की तरफ से आम जनता से समस्या हल करने पर कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। कंपनी को निगम वाटर सप्लाई लीकेज, पेयजल समस्या, क्लोरीनेशन, ट्यूबवैल खराब होने, ट्यूबवैल चलाने-बंद करने से लेकर पेयजल संबंधी सभी समस्याओं का हल करने जैसे मेंटेनेंस के कार्य सौंपेगा। 2 साल का ठेका करीब 90 करोड़ रुपए में होगा। { निगम को क्या फायदा होगा -निगम हर साल करीब 40 करोड़ रुपए वाटर सप्लाई पर खर्च करता है, जिसमें लाइन मेंटेंनेंस, ट्यूबवैल चलाने, बंद करने से लेकर सभी कार्य शामिल हैं। फेल ट्यूबवैल की जगह नए ट्यूबवैल भी कंपनी लगाएगी। निगम का स्टाफ अन्य काम में लगाएंगे। सालाना खर्च से ही निजी कंपनी से समय पर काम पूरा करवाया जाएगा। समय की बचत होगी। मौजूदा हालात…95 वार्डों में निगम वाटर सप्लाई करता है, ढेरों शिकायतों दूषित पेयजल सप्लाई की आती हैं, जिन्हे हल करने में कई दिन लगते हैं। लोगो को कई दिनों तक दूषित पानी पीने या बिना पानी के गुजारा करना पड़ता है। {शहर में 1371 ट्यूबवैल चल रहे हैं। {2726 किमी. की वाटर सप्लाई लाइनें शहर में। {412 ट्यूबवैल इस समय चैंबर वाले हैं। {343 ट्यूबवैल ऐसे हैं, जिन पर डोजर लगे हैं।


