959.22 करोड़ का बजट, पिछले साल से सात प्रतिशत अधिक

रांची विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 959.22 करोड़ का बजट तैयार कर लिया है। यह बजट पिछले साल की अपेक्षा सात प्रतिशत अधिक है। इस बजट में एक तरफ शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाया गया है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्थिरता, कर्मचारियों के हित और सिस्टम की पारदर्शिता पर भी फोकस किया गया है। यह बजट बुधवार को प्रभारी कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई वित्त समिति की बैठक में सदस्यों के चर्चा के आंशिक सुधार के साथ स्वीकृति प्रदान कर दी गई। पिछले वर्ष बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, नियमित भुगतान और प्रशासनिक खर्च में चला जाता था। इस बार योजना मद का हिस्सा बढ़ाया गया है, जो यह संकेत देता है कि विश्वविद्यालय अब भविष्य निर्माण – यानी अकादमिक विकास, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना चाहता है। बैठक में वीसी के अलावा फाइनेंशियल एडवाइजर अजय कुमार, फाइनेंस अफसर डॉ दिलिप प्रसाद, रजिस्ट्रार डॉ गुरुचरण साहू समेत अन्य थे। अब शिक्षकों-कर्मचारियों के पीएफ मद की राशि के एक एकाउंट में जमा होगा। अभी सभी शिक्षकों-स्टॉफ का अलग-अलग एकाउंट था। एक एकाउंट में रखने का उद्देश्य अधिक ब्याज प्राप्त करना है। वहीं शिक्षकों-स्टॉफ का कितना राशि बैंक में जमा है, इसके लिए विवि स्तर पर रजिस्टर बनाया जाएगा, जिसकी मॉनिटरिंग हाइलेवल कमेटी करेगी। हालांकि इसका विवि के स्टॉफ ने विरोध किया है। कहा कि सभी का राशि एक एकाउंट रखना अनुचित है। कर्मचारियों को एमएसीपी राशि देने के लिए सरकार से रुपए की मांग की जाएगी, जिसका बजट में प्रावधान किया गया है। अभी एमएसीपी राशि विवि प्रशासन आंतरिक संसाधन से प्रदान करता है। सिक्योरिटी गार्ड मद में पहली बार सरकार से राशि मांगी गई है। गेस्ट फैकल्टी का मानदेय भी बजट में शामिल किया गया है। अभी गेस्ट फैकल्टी के लिए सरकार मानदेय राशि नहीं देती है। सरकार ने सभी विवि को गेस्ट फैकल्टी नहीं रखने का निर्णय कैबिनेट में लिया था। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश से गेस्ट फैकल्टी पढ़ा रहे हैं, जिनकी संख्या 124 है। फाइनेंस कमेटी ने होल्डिंग टैक्स भी बजट में शामिल करने के लिए कहा है। इस मद में हर साल लगभग 65-70 लाख रुपए खर्च होता है। बिजली खर्च को भी बजट में शामिल किया जा सकता है। इसमें अधिक राशि नहीं लगेगी। क्योंकि अधिकतर संस्थानों में सोलर सिस्टम लगे हैं। मल्टीपरपज मूल्यांकन केंद्रों और प्रश्नपत्र सेट करने वाले शिक्षकों के पारिश्रमिक निर्धारण के लिए गाइडलाइन बनाने को कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी की सिफारिश पर रेट तय होंगे। इससे पहले जारी आदेश में विवि प्रशासन ने झारखंड राज्य विवि अधिनियम-2000 की धारा 47(1) का हवाला देते हुए कहा था कि प्रत्येक कॉलेज के प्राचार्य को आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुमानित आय और व्यय का विवरण निर्धारित प्रारूप में तैयार करना होगा। यह बजट कॉलेज की शासी निकाय या प्रबंधन समिति से स्वीकृत कर विश्वविद्यालय के कुलपति को प्रस्तुत करना था । बहुउद्देशीय परीक्षा भवन समेत अन्य मूल्यांकन केंद्रों का अभी तक रेट तय नहीं है। इसके अलावा क्वेश्चन पेपर सेट करने, प्रैक्टिकल एग्जाम और एक्सटर्नल-इंटरनल के बीच पारिश्रमिक वितरण को लेकर एक कमेटी गठित जाएगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नए दर लागू किया जाएगा। इससे पहले विवि ने सभी इकाइयों से अपने प्रस्तावित बजट की प्रति पत्र प्राप्त होने के दो दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप में विश्वविद्यालय को प्रेषित करने को कहा था।।

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