बीड़ी ज्यादा पीने से हार्ट की तीनों नसे ब्लॉक हुई:बुजुर्ग को चेस्ट में हुई समस्या, 4 घंटे जेएलएन में ऑपरेशन हुआ, नई नस लगाई, अब स्वस्थ

अजमेर संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में 70 साल के बुजुर्ग की हार्ट की बाईपास सर्जरी की गई। इसमें 15 सेंटीमीटर की एक नई नस बुजुर्ग के लगाई गई। ज्यादा बीड़ी पीने के कारण बुजुर्ग का कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया और हार्ट की तीनों नसे ब्लॉक हो गई थी। जिसके चलते बुजुर्ग को चेस्ट पेन की समस्या उत्पन्न होने लगी। बुजुर्ग के परिवार ने जेएलएन अस्पताल के कार्डियोलॉजी में दिखाया था। डॉक्टर्स की टीम ने पहली बार जयपुर की टीम से मदद लिए बिना अजमेर एनेस्थीसिया टीम के जरिए सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। यह ऑपरेशन करीब 4 घंटे तक चला था। बुधवार को इसकी जानकारी प्रिंसिपल डॉक्टर अनिल सामरिया, अधीक्षक डॉक्टर अरविंद खरे, उपाधीक्षक डॉ अमित यादव और कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉक्टर प्रशांत कोठारी की ओर से दी गई। एंजियोग्राफी से हार्ट की नसें ब्लॉक होने की मिली जानकारी सिटीवीएस विभाग के डॉक्टर डॉ.प्रशांत कोठारी ने बताया कि 70 साल का बुजुर्ग अजमेर के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में परिवार सहित छाती में दर्द की समस्या लेकर आया था। डॉ.प्रमोद पारीक ने उनकी एंजियोग्राफी की और जांच में पाया कि बुजुर्ग की हार्ट की तीनों इसे ब्लॉक है। बुजुर्ग के एंजियोप्लास्टिक होना संभव नहीं थी जिसके चलते बुजुर्ग को बाईपास सर्जरी का सुझाव दिया गया। 15 सेंटीमीटर की नई नस लगाई, 4 घंटे चला ऑपरेशन डॉ.प्रशांत कोठारी ने बताया कि 19 नवंबर को बुजुर्ग को ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया। सर्जरी बहुत कठिन थी क्योंकि बुजुर्ग की हार्ट की धड़कन की क्षमता करीब 30 से परसेंट 35% थी। नॉरमल हार्ट करीब 60% काम करता है। एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर अरविंद खरे के मार्गदर्शन में मरीज को सफलतापूर्वक बेहोश किया गया और आईसीयू में करीब 4 घंटे तक ऑपरेशन चला था। इस दौरान मरीज के करीब 15 सेंटीमीटर की एक नई नस ट्रांसप्लांट की गई। 5 दिन ऑब्जर्वेशन में मरीज को रखा गया। मरीज अब स्वस्थ है। प्राइवेट में 2 लाख तक खर्चा प्रिंसिपल डॉक्टर अनिल सामरिया ने बताया कि मरीज की बाईपास सर्जर मुख्यमंत्री आरोग्य योजना में निशुल्क रूप से की गई। प्राइवेट हॉस्पिटल में यह सर्जरी करीब डेढ़ से 2 लाख के बीच में की जाती है। प्रिंसिपल ने बताया कि इससे पहले बाईपास सर्जरी के लिए उन्हें जयपुर एनेस्थीसिया टीम से मदद लेनी पड़ती थी। लेकिन इस बार अजमेर में ही एनेस्थीसिया टीम से मदद लेकर सफलतापूर्वक के बाईपास सर्जरी की गई। मरीज को इस दौरान बाईपाईप मशीन पर भी लिया गया था।

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