बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के गम्हरिया ग्राम पंचायत में 26 वर्षीय युवा किसान रिजवान अंसारी ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर खीरे की खेती में सफलता हासिल की है। उन्होंने अपने डेढ़ एकड़ खेत में वैज्ञानिक विधि से खीरे की फसल लगाकर उन्नत कृषि का एक नया अध्याय लिखा है। रिजवान अंसारी ने बताया कि खीरे की फसल लगभग 35 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है। फसल तैयार होने के बाद अब प्रतिदिन एक दिन छोड़कर 40 से 50 क्विंटल तक खीरे की पैदावार मिल रही है। थोक बाजार में खीरे का भाव 25 से 30 रुपए प्रति किलो तक मिल रहा है, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। लाभ-हानि बाजार मूल्य पर निर्भर किसान रिजवान ने यह भी बताया कि खीरे की खेती में उत्पादन तो अच्छा मिलता है, लेकिन लाभ-हानि पूरी तरह बाजार मूल्य पर निर्भर करती है। यदि फसल तैयार होने के समय बाजार में अच्छा भाव मिले तो किसान बड़ी कमाई कर सकता है, अन्यथा नुकसान की संभावना भी रहती है। इसके बावजूद, उन्होंने आधुनिक तकनीक और कड़ी मेहनत के भरोसे खेती को ही अपना भविष्य चुना है। भाई के साथ मिलकर कर रहे खेती रिजवान अंसारी अकेले नहीं, बल्कि उनके भाई तौहीद अंसारी और आरिफ अंसारी भी मिलकर इस खेती का संचालन करते हैं। सामूहिक प्रयास और आधुनिक तकनीकों के बेहतर उपयोग के कारण तीनों भाइयों ने खीरे की बंपर पैदावार कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रही है। उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के बाजारों में भेजा जाता है खीरा उत्पादक किसान बताते हैं कि खीरे की गुणवत्ता और अधिक उत्पादन के कारण उन्हें बाजार तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सब्जी व्यापारी स्वयं खेतों में पहुंचकर खीरा खरीद लेते हैं। गम्हरिया का यह खीरा मुख्य रूप से उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के बाजारों में भेजा जाता है, जहां इसकी विशेष मांग बनी हुई है।


