एमडीएस यूनिवर्सिटी में बुधवार को संविधान दिवस समारोह का आयोजन हुआ। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने की। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा- संविधान में हमें बोलने की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि कोई किसी के लिए अपशब्द का प्रयोग करें या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करें। इस मौके पर उन्होंने संविधान निर्माण समिति में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के शामिल होने की घटना का भी विवरण किया। संविधान में हमें बोलने की स्वतंत्रता दी गई
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े बुधवार को एमडीएस यूनिवर्सिटी पहुंचे। जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल और कुलसचिव कैलाश चंद शर्मा सहित जिला प्रशासन ने उनका स्वागत किया। राज्यपाल सबसे पहले संविधान पार्क गए। इसके बाद परिसर में स्थित सरस्वती मंदिर में जाकर दर्शन किए। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने संविधान का महत्व बताते हुए इसके निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने कहा संविधान में हमें बोलने की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं की कोई किसी के लिए अपशब्द का प्रयोग करें या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करें। उन्होंने संविधान निर्माण समिति में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के शामिल होने की घटना का भी विवरण किया। देशवासी हमारे संविधान पर गर्व करें
राज्यपाल ने कहा-संविधान की एक विशेषता यह भी है कि इसमें अंगीकृत करने की बात की गई है, इसका मतलब यह कि हम देशवासी इसे स्वीकार करें। किस तरह लॉर्ड मैकाले ने इस देश की संस्कृति को नष्ट करने के लिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में ही परिवर्तन कर दिया। देशवासी हमारे संविधान पर गर्व करें और इसे समझे इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह परंपरा शुरू की है कि अब प्रतिवर्ष संविधान दिवस समारोह आयोजन किया जाने लगा है। कश्मीर को भारत से अलग रखने की साजिश रची गई थी
राज्यपाल ने अपने संबोधन में बताया- किस तरह कश्मीर को भारत से अलग रखने की साजिश रची गई थी। डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी ने इसी के खिलाफ अपना आंदोलन शुरू किया था। हालात यह थी की आजादी के कई साल बाद तक कश्मीर में तिरंगा झंडा नजर नहीं आता था। पहली बार डॉक्टर मनोहर जोशी ने कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया उस घटना के साक्षी वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे।


