डूंगरपुर में शिक्षक भंवरलाल परमार के निलंबन के विरोध में भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। मोर्चा ने शिक्षक के निलंबन को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए उन्हें तुरंत बहाल करने की मांग की है। डूंगरपुर जिले के भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा के अध्यक्ष तुषार परमार ने बताया कि शिक्षा विभाग ने कुछ दिन पहले शिक्षक भंवरलाल परमार को निलंबित किया था। उन पर सरकार व समाज विरोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी करने तथा एक राजनीतिक पार्टी के पोस्टर-बैनर पर फोटो छपने के आरोप थे। तुषार परमार के अनुसार, शिक्षक परमार एक आदिवासी समाज सुधारक हैं और उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत निलंबित किया गया है। इस कार्रवाई से आदिवासी समाज में गहरा रोष व्याप्त है। मोर्चा ने इसे सरकार की दमनकारी नीति का उदाहरण बताया। मोर्चा का तर्क है कि इतिहास पढ़ाना, संस्कृति समझाना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना अपराध नहीं, बल्कि शिक्षण का हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट कहता है कि आदिवासी इतिहास-संस्कृति पर बोलना अपराध नहीं है, तो भंवरलाल परमार का निलंबन किस कानून के तहत हुआ है। भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने कहा कि शिक्षक परमार का निलंबन केवल एक व्यक्ति या शिक्षक पर हमला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज, आदिवासी अस्मिता, आदिवासी इतिहास, आदिवासी संस्कृति और उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। धरना प्रदर्शन के बाद भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राष्ट्रपति, राज्यपाल, जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के नाम था, जिसमें शिक्षक भंवरलाल परमार को तुरंत बहाल करने की मांग की गई है।


