जयपुर की प्रख्यात रेडियोलॉजिस्ट और वाटरकलर आर्टिस्ट डॉ. सुषमा महाजन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कला मंच पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। 15 से 21 नवंबर 2025 तक पेरिस में आयोजित कला प्रदर्शनी में उन्होंने अपनी आठ वाटर कलर पेंटिंग्स प्रदर्शित की। यह प्रदर्शनी आर्ट गैलरी ‘एस्पास सोरबॉन’ (Espace Sorbonne) में आयोजित हुई, जो फेमस नोट्रे डेम कैथेड्रल के पास स्थित है। यह दुनियाभर के कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण कला स्थल माना जाता है। पेरिस में कला प्रेमियों और समीक्षकों ने डॉ. सुषमा महाजन की कला की विशेष रूप से सराहना की है। भारतीय रंग-संवेदना और भावनात्मक अभिव्यक्ति के अद्भुत संयोजन ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को खासा प्रभावित किया। उनकी पेंटिंग्स में प्रकृति, भारतीय सांस्कृतिक विरासत, शास्त्रीय संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुंदर संगम देखने को मिला। कोविड लॉकडाउन में शुरू हुई यात्रा जयपुर के भगवान महावीर कैंसर अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुषमा ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान पेंटिंग का अभ्यास शुरू किया था। उन्होंने बताया कि पहली बार मैंने अपनी बेटी के लिए एक प्रोजेक्ट बनाया था, तो वाटर कलर में था। वह इतना अच्छा बना कि बेटी सहित अन्य लोगों ने कहा कि यह तो इतना परफेक्ट बना है, स्कूल में इसे बेटी का बनाया हुआ मानेंगे ही नहीं। यहां परिवार के हर सदस्य ने उस आर्टवर्क की सराहना की। इसके बाद लॉकडाउन लग गया, जो बेटी के प्रोजेक्ट के लिए वाटर कलर और पेपर, ब्रश थे, उनसे काम करना शुरू किया। एक साल लगातार अभ्यास किया। शुरू में यह शौक के रूप में शुरू हुआ था, बाद में मात्र चार सालों में उनकी पहचान और जुनून का आधार बन गया। उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के वाटर कलर कला में एक अनूठी शैली विकसित की है। शुरुआत में जरूर यूट्यूब से वाटर कलर पेंटिंग के बारे में जानकारी ली थी। मेडिटेशन की तरह है कला उन्होंने बताया कि मेरे लिए कलाकृतियां मेडिटेशन की तरह हैं। दिनभर मैं कैंसर पेशेंट्स के बीच ही रहती हूं। ऐसे में वाटर कलर पेंटिंग मुझमें ऊर्जा का संचार करती है। हॉस्पिटल जाने से पहले और वहां से आने के बाद मैं पेंटिंग बनाती हूं। यह मेरे लिए काफी पॉजिटिव एनर्जी की तरह काम करती है। उन्होंने बताया कि जल्द ही मैं अपनी कला शैली में बदलाव कर नए तरीके की पेंटिंग्स पर काम करने वाली हूं। भारतीय शास्त्रीयता और आधुनिक भावना का संतुलन उन्होंने बताया कि पेरिस प्रदर्शनी में उनकी आठ कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। इसमें वाइब्स ऑफ हार्मेन के नाम से एक कलाकृति थी, जिसमें सितार और राजस्थानी टेक्सटाइल पैटर्न अजरक कला को जोड़कर बनाया था। यह कलाकृति संगीत की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव प्रतीत होता है। इसमें भगवान गणेश सीरीज की पेंटिंग भी प्रदर्शित थी, जिसमें बड़े कानों के माध्यम से धैर्य और सुनने की कला के संदेश को रूपायित किया गया है। डॉ. सुषमा ने बताया कि इन कलाकृतियों के अलावा टेम्पल आर्किटेक्चर प्रेरित रचनाएं खास रही। होयसला और चोल शैली की मूर्तिकला की बारीकियों से प्रेरित, मिनिएचर डिटेलिंग और त्रि-आयामी प्रभाव के साथ यह कलाकृतियां कला प्रेमियों पर असर छोड़ती नजर आई। जयपुर में हो चुके कई सोलो शो डॉ. सुषमा महाजन जयपुर सहित देशभर में अपनी कई एग्जीबिशन आयोजित कर चुकी हैं। उन्होंने जवाहर कला केन्द्र, ताज आमेर और रामबाग पैलेस में सोलो शो प्रस्तुत किया हुआ है। इससे पहले दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट गैलरी में दो सोलो प्रदर्शनियां आयोजित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पति एक सीनियर आईएएस ऑफिसर नवीन महाजन है, जिन्होंने मेरी कला को प्रोत्साहित करने का काम किया है।


