लुधियाना की सरहिंद नहर लाइनिंग मामले में वन क्षेत्र में अवैध काम पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सरकारी अधिकारियों की घोर लापरवाही और संभावित मिलीभगत पर कड़ी फटकार लगाते हुए सरहिंद नहर की कंक्रीट लाइनिंग के दौरान वन क्षेत्र (फॉरेस्ट) को हुए भारी नुकसान के मामले में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने सिंचाई विभाग के मुख्य सचिव को तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि, अवैध रूप से काम करने वाले ठेकेदारों को भी बख्शा नहीं जाएगा। क्या है पूरा मामला? यह मामला पब्लिक एक्शन कमेटी (PAC) द्वारा दायर किया गया था। PAC सदस्यों इंजीनियर कपिल अरोड़ा और डॉ. अमनदीप सिंह बैंस ने बताया कि दिसंबर 2024 में जब लाइनिंग का काम शुरू हुआ, तो रूपनगर डिवीजन के कार्यकारी अभियंता ने वन विभाग की अनिवार्य NOC लिए बिना ही ठेकेदारों को पेड़ों की कटाई और वन क्षेत्र में अवैध बैचिंग प्लांट लगाने की अनुमति दे दी। गंभीर उल्लंघन साइट पर अवैध खनन (माइनिंग) के कारण पेड़ों की जड़ें नंगी हो गईं और यहां तक कि दो दुर्लभ श्रेणी-1 के सांपों के मारे जाने की भी सूचना मिली। समिति ने की पुष्टि NGT द्वारा नियुक्त संयुक्त समिति ने PAC के सभी आरोपों की पुष्टि की। वन विभाग ने माना कि अवैध रूप से काटे गए पेड़ों की लकड़ी भी गायब हैं। NGT के तीन सख्त निर्देश NGT ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य मंजूरी न लेना इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 का सीधा उल्लंघन है। ट्रिब्यूनल ने तीन सख्त निर्देश जारी किए जिसमें जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिया गया है कि वे लापरवाह और संदिग्ध मिलीभगत वाले अधिकारियों की पहचान करके तीन महीने के भीतर कानूनी कार्रवाई करें और रिपोर्ट पेश करें। सिंचाई और वन विभाग दोनों को नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों के ख़िलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। वन विभाग को आदेश दिया गया है कि वह इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 की धाराओं के तहत मामले की कार्रवाई तुरंत शुरू करें और चार महीने के भीतर इसे पूरा करें। जनता के पैसे से नहीं होगी भरपाई वन विभाग ने सिंचाई विभाग पर ₹40 लाख से अधिक का पर्यावरण जुर्माना लगाया है। PAC सदस्यों ने दलील दी कि EC जनता का पैसा है जिसका इस्तेमाल अधिकारियों की गलती की भरपाई के लिए करना जनता पर और बोझ बढ़ाना है। NGT ने इस दलील को गंभीरता से लिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई के आदेश दिए। PAC सदस्यों ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह उन सभी अधिकारियों के लिए एक सबक है जो विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हैं।


