करौली में संविधान दिवस के अवसर पर बुधवार को राजकीय महाविद्यालय में ‘बाल संसद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली से अवगत कराना और उनमें संवैधानिक जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन, कानून निर्माण प्रक्रिया की जानकारी और ‘क्लाइमेट चेंज बिल’ पर संसदीय शैली में चर्चा कराई गई। कार्यक्रम का आयोजन राजकीय महाविद्यालय करौली और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) करौली के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसकी अध्यक्षता प्राचार्य रफीक अहमद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण करौली की सचिव एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ममता चौधरी उपस्थित रहीं। प्राचार्य रफीक अहमद ने ‘हमारा संविधान – हमारा स्वाभिमान’ थीम के तहत विद्यार्थियों को प्रस्तावना का ऑनलाइन वाचन करने और प्रमाणपत्र डाउनलोड करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा और नागरिकों की आज़ादी की रक्षा करने वाला जीवंत आधार है। ‘बाल संसद’ सत्र में विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष की भूमिका में रहकर ‘क्लाइमेट चेंज बिल’ पर अपने तर्क प्रस्तुत किए। विस्तृत बहस के बाद सभापति ने ध्वनिमत से मतदान करवाया, जिसके बाद बिल पारित कर दिया गया। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निर्णय निर्माण की समझ विकसित की। कार्यक्रम में एनएसएस इकाई, राजनीतिक विज्ञान विभाग और अकादमिक समिति द्वारा निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विषय था-देश की आज़ादी के बाद डॉ. अम्बेडकर के सिद्धांतों और विचारों का व्यावहारिक क्रियान्वयन। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। मंच संचालन एडवोकेट दीपक ने किया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। समारोह के दौरान संवैधानिक मूल्यों को जीवन में उतारने का संकल्प भी लिया गया।


