बड़वानी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में गंभीर अव्यवस्था का आरोप लगा है। जागृत आदिवासी दलित मुक्ति संगठन ने बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि अगर समय पर सुधार नहीं हुआ, तो हजारों आदिवासी, महिलाएं और प्रवासी मजदूर मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। सर्वेक्षण में देरी और BLO की उपस्थिति नहीं संगठन ने बताया कि 30 दिन की सर्वे अवधि में से 21 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अधिकांश गांवों में घर-घर सर्वे अभी तक शुरू नहीं हुआ। 4 दिसंबर तक सर्वे पूरा करने की अंतिम तिथि है, जो मौजूदा परिस्थितियों में असंभव नजर आती है। संगठन की सदस्य नासरी बाई और बलराम सस्ते ने बताया कि चुनाव आयोग (ECI) के निर्देशों के बावजूद बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के पास फॉर्म-6 और फॉर्म-8 पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। कई स्थानों पर केवल नाम हटाने वाले फॉर्म ही दिए गए हैं। BLO को गांवों में भेजने के बजाय दफ्तरों में बैठाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को अपना डेटा सत्यापित करने या फॉर्म जमा करने का मौका नहीं मिल रहा है। प्राप्ति न देना सबसे बड़ी समस्या चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हर भरे गए फॉर्म की नागरिक को प्राप्ति दी जाए। लेकिन बड़वानी में BLO फॉर्म लेकर गांवों में नहीं गए, बल्कि दफ्तर में ही फॉर्म भरे जा रहे हैं। ग्रामीणों के पास कोई प्रमाण नहीं कि उनका आवेदन स्वीकार हुआ है। इसके कारण अंतिम मतदाता सूची में नाम कटने का खतरा बढ़ गया है। आदिवासी और प्रवासी परिवार दोगुनी मार झेल रहे • पलायन के कारण अधिकतर घर खाली हैं।
• सर्वे का समय अत्यंत सीमित है।
• BLO गांवों से दूर दफ्तरों में बैठाए गए हैं।
• फॉर्म, ऐप और स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं। संगठन ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया गरीबों, आदिवासियों, मजदूरों और महिलाओं को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने की दिशा में बढ़ती दिखाई देती है। यह है मुख्य मांगें संगठन ने चेताया कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो हजारों पात्र मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।


