पीलियाखाल नाले के गंदे पानी व केमिकल के कारण हंसदास मठ में भगवान की मूर्तियां और चांदी के मुकट काले पड़ रहे हैं। मंदिर के उत्तराधिकारी का कहना है कि भगवान को चोला चढ़ाने के बाद अगले दो दिन में मूर्ति काली पड़ने लग जाती है। ऐसा पहली बार हो रहा है। दरअसल, हंसदास मठ में दो स्थानों पर मंदिर बने हुए हैं। एक नए मंदिर में। दूसरा मंदिर से लगे नाले के किनारे। मंदिर के उत्तराधिकारी महामंडलेश्वर पवनदास महाराज कहते हैं मंदिर के नाले के किनारे बने हनुमानजी की मूर्ति, नागदेवता की मूर्ति और सप्तऋषि की मूर्ति पर सबसे ज्यादा असर हो रहा है। लगता ही नहीं है कि मूर्ति पर चोला चढ़ाया गया है। इसी मंदिर के सामने बने मंदिर के चांदी के आभूषण काले पड़ने लगे थे, इन्हें कालेपन से बचाने के लिए लेमिनेशन करवाना पड़ा। नाले में पानी आने के बाद से ही काली पड़ रही मूर्ति, निगमायुक्त को बता चुके
महाराज ने कहा यह बरसों पुराना मंदिर है। मठ पर पहली बार इतनी ज्यादा परेशानी हो रही है। कुछ समय पहले नाला टेपिंग के कारण नाला पूरा सूख गया था। अब इसमें वापस पानी आ गया है। इसके बाद से ही मूर्ति काली पड़ने लगी हैं। पूरे मामले की जानकारी हमने निगमायुक्त दिलीप यादव को भी दी है। उन्होंने इस पूरे मामले में जल्द निराकरण की बात भी कही है। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. दिलीप वाघेला, पूर्व वैज्ञानिक, प्रदूषण बोर्ड नालों में मौजूद अपशिष्ट से फीकी पड़ रही परत मंदिर के समीप से नाला गुजर रहा है। इसमें सीवरेज व आसपास से गंदा पानी मिलता है। साथ ही लोग कचरा भी फेंकते हैं। इससे पानी जमा हो रहा है। यह स्थिति खतरनाक होती है, क्योंकि गंदे और रुके हुए पानी से अमोनियम सल्फेट, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी हानिकारक गैस निकलने की संभावना रहती है। मूर्ति पर चोला चढ़ाने के लिए तेल के साथ सिंदूर लगाया जाता है। इसमें खुशबू के लिए अन्य तत्व भी मिलाते हैं। सिंदूर में सीसा (लेड) अधिक मात्रा में होता है। नाले में अपशिष्ट पानी से निकलने वाली गैस, हवा व सिंदूर के साथ रासायनिक क्रिया कर लेड सल्फाईड, अमोनियम सल्फाइड जैसे हानिकारक केमिकल कंपाउंड का निर्माण करती है। यही मूर्ति पर लगे सिंदूर की चमकीली परत को फीका या काला कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं नालों के पास घरों में पूर्व में भी सामने आई हैं। इसमें घरों में धातुओं के बर्तनों का रंग काला पड़ने लगा था।


