प्रसिद्ध कहानीकार आर्केश की लिखित किताब ‘सुलभ प्रेम दुर्लभ’ सामाजिक व पारिवारिक जीवन पर आधारित है। इसमें 15 कहानियों को संकलित किया गया है। इसे निखिल प्रकाशन से प्रकाशित किया है और इसका मूल्य 100 रुपए है। इन कहानियों में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि प्रेम के साथ रह कर कैसे जीवन को सरल बनाया जा सकता है। आपसी कलह और मनमुटाव के कारण जीवन की अशांति की वजह ढूंढती कहानियां, बेशक अपनी-सी लगेगी। परिवार और समाज में व्याप्त कठिन संघर्षों के बीच भी रिश्तों में मधुरता बनी रहे, तभी जीवन सार्थक है और यह सार्थकता प्रेम के साथ जुड़ कर ही प्राप्त किया जा सकता है। स्वार्थ और त्याग के द्वंद्व के बीच फंसा इंसान जीवन को आसान बनाने के लिए किसे चुने? ऐसी ही स्थितियों को दर्शाती इन कहानियों में लेखक का देखा, सुना और भोगा अनुभव भी शामिल है। आर्केश ने बताया कि हम भले ही ध्यान न दें, लेकिन यह सच है कि माता-पिता के अच्छे कर्मों का मीठा फल बच्चे तक चख लेते हैं। संग्रह की एक कहानी, ‘प्रतिफल’ में कुछ ऐसा ही दर्शाया गया है। कहानी की एक पात्र राधा, जब शहर से गांव लौट रही थी तो उसके सारे पैसे चोरी हो गए। तब एक ऐसे शख्स ने उसकी मदद की जो कभी शहर गया ही नहीं था। यह घटना सोचने पर विवश करती है कि वाकई कर्मों का फल इस धरती पर भी मिल जाता है। ग्रामीण परिवेश में फलती-फूलती ये कहानियां भाग-दौड़ की जिंदगी से उठी थकान को दूर करने में सफल होती है। यह कहानी संग्रह अमेजन पर उपलब्ध है।


