राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के पुनर्गठन का नोटिफिकेशन जारी करने के बाद से ही विरोध बढ़ता जा रहा है। इसे लेकर लोग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के यहां चक्कर लगा रहे हैं तो वहीं अब महापंचायत और आंदोलन का दौर शुरू हो गया है। जिले में कई गांवों के ग्रामीणों के विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है उनकी ग्राम पंचायत को समीप की पंचायत समिति से हटाकर दूर की पंचायत समिति में जोड़ दिया गया है। कई गांव तो ग्राम पंचायत बनाने की मांग पूरी नहीं होने पर विरोध में खड़े हो गए। बड़ियाल कलां में भी पंचायत समिति की मांग को लेकर धरने प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पंचायत पुनर्गठन को लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा बिना सोचे समझे और भौगोलिक स्थिति को देखे बिना ही पुनर्गठन कर दिया गया। पंचायत पुनर्गठन में जिन गांव की सीमाएं आपस में नहीं मिलती उन्हें भी जोड़ दिया गया। साथ ही नांगल राजावतान और बैजूपाड़ा पंचायत समिति के पुनर्गठन में भी 30 से 35 किलोमीटर दूरी की ग्राम पंचायत को जोड़ दिया गया, जो तर्कसंगत नहीं है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जिला मुख्यालय के समीप की कई ग्राम पंचायतों को भी 20 किलोमीटर दूर स्थित नांगल राजावतान पंचायत समिति से जोड़ दिया गया। बांदीकुई की कई ग्राम पंचायतों में बड़ा विरोध पुनर्गठन में बांदीकुई मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम पंचायत को बैजूपाड़ा पंचायत समिति में जोड़ दिया गया। बड़ियाल कलां के ग्रामीणों द्वारा काफी लंबे समय से पंचायत समिति की मांग की जा रही थी, वह भी पूरी नहीं हुई। ऐसे में वहां के ग्रामीण भी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। बड़ियाल को पंचायत समिति बनाने की मांग को लेकर विधायक भागचंद टांकड़ा ग्रामीणों की मांग पर सीएम को ज्ञापन सौंप चुके हैं। राज्य सरकार को भेज रहे रिपोर्ट- कलेक्टर जिले में हुए ग्राम पंचायत और पंचायत समिति पुनर्गठन को लेकर ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को दिए गए ज्ञापनों को लेकर कलेक्टर देवेन्द्र कुमार ने कहा कि ग्रामीणों की जन भावनाएं या जनप्रतिनिधियों द्वारा जो भी शिकायत दी जा रही है। उन्हें राज्य सरकार को भेजा जा रहा है, अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर ही होगा।


