गोड्डा में बनी तसर सिल्क साडि़यों को रांची लाकर की जाती है पेंटिंग; 15 दिन लगते हैं, कीमत 12 हजार

राष्ट्रीय खादी और सरस महोत्सव के 15वें दिन शुक्रवार को भारी भीड़ उमड़ी। पलाश (जेएसएलपीएस) के सभी जिलों के सीआरपी दीदी मेला घूमने आईं। रुसखी मंडल दीदी से मिलकर दीदी की जुबानी दीदी की कहानी जानी। उनसे सीआरपी दीदी लोग को अपने गांव की सखी मंडल दीदी को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली। बच्चों ने विभिन्न प्रकार की रंगोली बनाई, विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। नृत्य और गीत का प्रोग्राम किया गया। ट्राइबल फैशन शो का आयोजन भी हुआ। साहेबगंज जिला के सरवानी खातून, लक्ष्मी आजीविका सखी मंडल की (10) दीदी के साथ चूड़ी का व्यापार करके अपनी आजीविका को बढ़ा रही हैं। सरवरी खातून दीदी 2022 से समूह में जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने से पहले दीदी लोगों के समाज में घर से निकलने का कुछ करने का आदेश नहीं था। 1 लाख का ऋण लेकर चूड़ी का व्यापार कर रही हंै। मेले में दीदी को प्रत्येक दिन 20 से 30 हजार तक का इनकम हो रहा है। तसर और कांजीवरम की महंगी साडि़यों को शादी-ब्याह के लिए खरीद रहे हैं लोग मेले में झारक्राफ्ट के स्टॉल में हैंड पेंटेड तसर सिल्क की साडि़यां खास हैं। इन्हें गोड्डा के भगैया में बनाया जाता और फिर ये रांची केंद्र में आते हैं। यहां इन पर महिलाएं हैंड पेंटिंग करती हैं। एक साड़ी को पेंट करने में 15 ​दिन का समय लगता है। मार्केटिंग मैनेज उमाकांत ने बताया कि सबसे महंगी साड़ी 12,080 रुपए की है। वहीं, रांची खादी केंद्र के स्टॉल में खादी की कांजीवरम साडि़यां 25700 रुपए तक की कीमत की बिक रही हैं। सेल्सवुमन सोनी सिन्हा ने बताया शादी के लिए लोग इन्हें खरीद रहे हैं। खादी केंद्र रांची के स्टॉल में कांजीवरम साड़ी।

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