बर्खास्त कर्मचारी की विभागीय अपील को 14 साल में भी तय नहीं करने पर हाई कोर्ट ने जेवीवीएनएल पर 1 लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। साथ ही एक माह में अपील निस्तारण और हर्जाना राशि दो सप्ताह में प्रार्थी को देने में कहा है। जस्टिस गणेश राम मीणा ने यह आदेश महेश कुमार सैनी की याचिका पर दिया। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक विधवा अपने पति की बर्खास्तगी के खिलाफ साल 2011 में पेश विभागीय अपील के निपटारे की प्रतीक्षा कर रही है। विभाग और अधीक्षण अभियंता यह भी नहीं बता पाया है कि इतने सालों तक अपील को लंबित क्यों रखा और निस्तारण क्यों नहीं हुआ। अपील को बिना किसी कारण लंबित रखना बहुत दुखद है। मामले के अनुसार, प्रार्थी के पिता रामेश्वर प्रसाद जेवीवीएनएल में सहायक पद पर थे। इस दौरान ही एक मानसिक बीमारी के चलते गैर हाजिर रहने पर जेवीवीएनएल ने 3 दिसंबर 2009 को बर्खास्त कर दिया। उसकी मां ने 2011 में बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ विभागीय अपील की, लेकिन 14 साल तक जेवीवीएनएल ने तय नहीं किया। पिछले साल उसके पार्थी के पिता का निधन हो गया, लेकिन बर्खास्तगी आदेश अब भी बरकरार है। इस कारण उसे अनुकंपा नियुक्ति भी नहीं मिल रही।


